गंजेपन से परेशान हैं और समय से पहले चेहरे पर झुर्रियां भी आने लगी हैं, तो चिंता मत कीजिए। क्योंकि इन दोनों ही समस्याओं का समाधान आपके खून में छिपा है। आपके खून के कतरे से नए बाल उगाने के साथ ही झुर्रियों को भी दूर किया जा सकता है। महज 20 एमएल खून से निकाला गया प्लेटलेट्स गंजापन दूर करने के साथ चेहरे की खूबसूरती भी बढ़ा सकता है। यह जानकारी इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के अध्यक्ष डॉ. देबाशीष गुप्ता ने शुक्रवार को दी। चंडीगढ़ के वे औद्योगिक क्षेत्र फेज 1 स्थित एक होटल में इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के राष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर अतिथि मौजूद थे।
उन्होंने बताया कि प्लेटलेट्स में विकास की क्षमता होती है। इसी कारण से इसका उपयोग कर गठिया और स्पॉडिलाइटिस के मरीजों को राहत देने में सफलता मिली। इसी क्रम में गंजेपन के साथ ही कॉस्मेटिक के क्षेत्र में इस पर शोध किया गया। सकारात्मक परिणाम आने के बाद से त्वचा रोग विशेषज्ञ की देखरेख में जरूरतमंद लोगों को लाभ प्रदान किया जा रहा है। डॉ. देबाशीष ने बताया कि विदेश में इसका बहुत ज्यादा उपयोग हो रहा है। वहीं, देश के कुछ केंद्रों में इसकी शुरुआत की गई है।
नहीं रहेगा संक्रमण का खतरा
अपने खून से निकाले गए प्लेटलेट्स से गंजेपन और झुर्रियों का इलाज कराने पर संक्रमण का खतरा नहीं होगा। डॉ. देबाशीष का कहना है कि दूसरे व्यक्ति से लिए गए खून से संक्रमण का खतरा बना रहता है। इस दृष्टि से भी यह तकनीक कारगर है। डॉ. देबाशीष ने बताया कि प्लेटलेट्स को गंजेपन वाले क्षेत्र में इंजेक्शन के जरिए अंदर डालते हैं। वे उस एरिया में जाकर बंद ग्रोथ फैक्टर को दोबारा खोल देते हैं, जिससे बाल के फॉलिकल फिर से बाहर निकलने लगते हैं। फॉलिकल बालों को विकसित करने का काम करते हैं। इसके साथ ही बालों को पकड़कर रखते हैं। इससे बालों का झड़ना रुकता है। हेयर फॉलिकल के ऊपर एक खुला छेद होता है, यहीं से बाल त्वचा से बाहर निकलते हैं और फिर धीरे-धीरे बढ़ते रहते हैं।
बूटॉक्स से भी बेहतर परिणाम
बालों के फॉलिकल को खोलने वाला प्लेटलेट्स कोलेजन्स को भी सक्रिय कर देता है। डॉ. देबाशीष ने बताया कि कोलेजन त्वचा की इलास्टिसिटी और हाइड्रेशन को मेंटेन करता है। जब शरीर में कोलेजन का उत्पादन कम होना शुरू हो जाता है इसकी वजह से चेहरे पर महीन रेखाएं, झुर्रियां पड़ने लगती हैं। कॉस्मेटिक के क्षेत्र में प्लेटलेट्स थेरेपी का बूटॉक्स से भी बेहतर परिणाम सामने आ रहा है। डॉ. देबाशीष ने बताया कि दोनों ही स्थिति में तीन से चार स्टेप के बाद परिणाम सामने आने लगता है।