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आज का दिन हरियाणा कांग्रेस के लिए अहम, भूपेंद्र हुड्डा पर अलग राह चलने का दबाव

Sat, 10 Aug 2019 01:29 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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भूपिंदर सिंह हुड्डा - फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा में कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पहले ऊहापोह की स्थिति में है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बदलने को लेकर हाईकमान से आग्रह कर रहा हुड्डा गुट अब आर-पार की लड़ाई के मूड में दिख रहा है।

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दस अगस्त को होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में अगर नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर सहमति के साथ ही हरियाणा में नेतृत्व परिवर्तन पर मुहर नहीं लगी तो पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपनी राह अलग चुन सकते हैं। 

चूंकि, लोकसभा चुनाव में करारी हार से पहले ही हुड्डा गुट ने हाईकमान पर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर दबाव बना दिया था लेकिन कोई तब्दीली न होने और करारी हार के बाद कार्यकर्ताओं का हुड्डा पर अलग रास्ते जाने का दबाव है। प्रदेश में दो महीने बाद चुनाव है। हुड्डा गुट चाहता है कि विधानसभा चुनाव भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में लड़ा जाए। 
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लोकसभा चुनाव में करारी हार का ठीकरा हुड्डा गुट प्रदेश में कमजोर संगठन पर फोड़ चुका है। राष्ट्रीय नेतृत्व खुद राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कोई भी निर्णय लेने की स्थिति में नहीं था, इसलिए अब निगाहें कांग्रेस कार्यसमिति की शनिवार की बैठक पर टिकी हैं। इसमें अगर मनमाफिक निर्णय न हुआ तो पूर्व सीएम 18 अगस्त की रैली में अपने अलग चलने का एलान कर सकते हैं। 

विघटन के बाद इनेलो प्रदेश में लगभग खत्म हो चुकी है। जबकि कांग्रेस में अशोक तंवर पांच साल से ज्यादा के कार्यकाल में पार्टी को धरातल पर खड़ा नहीं कर पाए हैं।

पूर्व सीएम से जुड़े विधायक, पूर्व विधायक और पूर्व सांसद इन्हीं दलीलों का हवाला देते हुए हाई कमान से हुड्डा को कमान देने की पैरवी कर रहे हैं ताकि कांग्रेस को हरियाणा की सत्ता में लाया जा सके। भूपेंद्र हुड्डा व दीपेंद्र हुड्डा अनुच्छेद-370 हटाए जाने पर पार्टी स्टैंड से अपना अलग रुख क्लीयर कर चुके हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हुड्डा पर कार्यकर्ताओं का सख्त निर्णय लेने के लिए काफी दबाव है।

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अनुच्छेद-370 हटाने के अपने स्टैंड पर कायम दीपेंद्र

पूर्व कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने धारा 370 को खत्म करने का संकल्प संसद से पारित होने का दोबारा स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि वह अपने स्टैंड पर कायम हैं। जिस दिन संसद में अनुच्छेद 370 को हटाने का संकल्प पेश हुआ था, उसी दिन उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर सबसे पहले अपना रुख स्पष्ट कर करते हुए फैसले का समर्थन किया था। 

दीपेंद्र का कहना है कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पूरी कार्यसमिति को देश की भावनाओं से अवगत करा चुके हैं। सरकार की पूर्णतय ये जिम्मेदारी है कि 370 हटाने के फैसले का क्रियान्वयन तानाशाही से नहीं, समझदारी, विश्वास और शांति के माहौल में हो। 

देशहित में सरकार को इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि लोकतंत्र में सहमति और भरोसे से आगे बढ़ने के प्रयास सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। सभी मुख्यधारा के दलों को बातचीत का हिस्सा बनाना चाहिए। 21वीं सदी में अनुच्छेद 370 का कोई औचित्य नहीं है और इसको हटाना उचित कदम है। 
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