चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में अपार्टमेंट के प्रावधान को लेकर दाखिल जनहित याचिका में एक अर्जी दाखिल कर अपार्टमेंट की तरह फ्लोर वाइज इसकी सेल करने का मामला हाईकोर्ट के सामने रखा गया। हाईकोर्ट से अपील की गई कि मास्टर प्लान के अनुसार एक घर एक यूनिट है और इसे शेयर के नाम पर फ्लोर वाइज बेचने की अनुमति नहीं दी जा सकती। क्योंकि ऐसे में यह अपार्टमेंट हो जाएंगे। हाईकोर्ट ने अर्जी पर यूटी प्रशासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।
सुनवाई आरंभ होते ही कोर्ट को बताया गया कि अपार्टमेंट मामले का चंडीगढ़ अब तक हल नहीं निकाल पाया। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि लगातार प्रतिशत के आधार पर प्रापर्टी को बांटने को लेकर विवाद होता आ रहा है। अदालतों में इस प्रकार के मामले बढ़ते जा रहे हैं। क्या कोई ऐसा प्रावधान है जिससे इन मामलों की संख्या को कम किया जा सके। इस दौरान हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से उनका पक्ष पूछा। यूटी प्रशासन ने कहा कि वे अभी भी अपार्टमेंट के खिलाफ हैं और इंडीव्यूजवल यूनिट का समर्थन करते हैं। कोर्ट ने कहा कि सिटी ब्यूटीफुल में जिस प्रकार अपार्टमेंट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है उससे स्थिति विकट हो सकती है।
इस मामले को लेकर सेक्टर-10 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से उसके सचिव और अन्य सदस्यों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों से सेक्टर-10 सहित कई जगहों पर रिहाइशी प्लॉट्स का अवैध तरीके से निर्माण कर उन्हें अपार्टमेंट्स के तौर पर आगे बेचा जा रहा है। यह न सिर्फ चंडीगढ़ के मास्टर प्लान के खिलाफ है, बल्कि प्रशासन के कई बायलॉज और निर्देशों का उलंघन भी है। अगर अपार्टमेंट के प्रावधान को मंजूरी दी गई है तो इससे शहर के इंफ्रास्ट्रर पर बोझ काफी बढ़ जायेगा, क्योंकि जब एक ही प्लॉट्स की अगल-अलग मंजिल को अलग-अलग लोगों को बेचा जायेगा तो उस जगह पर जनसँख्या का घनत्व काफी बढ़ जायेगा।