चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से शहर में रेहड़ी-फड़ी वालों के चालान काटने और जुर्माना लगाने के खिलाफ प्रवासी भलाई संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अविनाश सिंह द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर वीरवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम के कमिश्नर, चंडीगढ़ के उपायुक्त और एडवाइजर को नोटिस जारी किया है। याचिका पर अगली सुनवाई 14 जून को होगी।
याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने अदालत को बताया कि वर्ष 2014 में बने टाउन वेंडिंग अधिनियम को चंडीगढ़ प्रशासन ने आज तक लागू नहीं किया है। इसका लाभ उठाते हुए चंडीगढ़ प्रशासन शहर में 25000 रेहड़ी-फड़ी वालों को चालान काटकर और उन पर जुर्माना लगाकर लगातार परेशान कर रहा है। याचिका में कहा गया कि प्रशासन की ओर से अभियान चलाकर वेंडरों का सामान जब्त किया जा रहा है और जुर्माने के तौर पर मोटी रकम वसूली जा रही है।
याचिका में मांग की गई कि जुर्माने के तौर पर वेंडरों से वसूली गई राशि को मय ब्याज लौटाया जाए और नगर निगम के स्टोर में रखा गया वेंडरों का जब्त सामान लौटाने के साथ-साथ चंडीगढ़ में टाउन वेंडिंग अधिनियम को लागू किया जाए। जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस गुरमीत राम की बेंच ने याचिका पर एडवोकेट अरोड़ा की दलीलें सुनने के बाद उक्त तीनों उच्च अधिकारियों को नोटिस जारी जवाब मांगा है।