पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने आयकर विभाग के नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। सुखबीर पर आरोप है कि उन्होंने प्रॉपर्टी की बिक्री से हुई आय को आयकर रिटर्न में कैपिटल इनकम के तौर पर नहीं दर्शाया।
पंजाबी हाउस बिल्डिंग सोसाइटी की कांसल में जमीन थी। इसके 96 सदस्यों में सुखबीर बादल भी शामिल थे। सोसाइटी ने यह जमीन टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट के लिए टाटा कैमलॉट को बेच दी और यह राजस्व विभाग में टाटा के नाम चली गई।
जमीन की बिक्री से हुई आय को सालाना रिटर्न में कैपिटल आय के तौर पर शामिल न करने पर आयकर विभाग ने नोटिस जारी किया था। यह नोटिस सोसाइटी के सभी सदस्यों को दिया गया था। सुखबीर बादल ने अमृतसर स्थित ट्रिब्यूनल बेंच से राहत न मिलने पर बेंच के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसमें आयकर आयुक्त बठिंडा और अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है।
इससे पहले ऐसे ही एक मामले में डिफेंस एवं विधायकों की सोसाइटी की जमीन टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट को बेची गई थी। इस मामले में भी पंजाब के कई विधायकों, पूर्व विधायकों एवं वीआईपी को आयकर विभाग ने नोटिस भेजे थे। उनकी याचिकाओं को भी टैक्स ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिया था।
इन्होंने भी हाईकोर्ट में टैक्स ट्रिब्यूनल के फैसलों को चुनौती दी थी। उन्होंने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट से करार हुआ था कि वह जमीन बिक्री के बदले कीमत और एक-एक फ्लैट देगा। भले ही सेल डीड हो चुकी है, लेकिन टाटा कैमलॉट ने पूरी कीमत अदा नहीं की है।
ऐसे में पूरी कीमत के हिसाब से होने वाली कैपिटल आय को उनके आयकर रिटर्न में जोड़ना गलत है, लिहाजा यह नोटिस रद्द किए जाने चाहिएं। इसके अलावा अभी प्रोजेक्ट अस्तित्व में ही नहीं आया और उन्हें फ्लैट भी नहीं मिले हैं।