सीबीआई जांच के बाद अब नगर निगम ने सेलवेल कंपनी से 1.40 करोड़ रुपये विज्ञापन शुल्क के रूप में वसूलने की तैयारी शुरू कर दी है।
निगम ने 13 साइट्स की कैल्कुलेशन के बाद 1.40 करोड़ रुपये कंपनी पर बकाया तय किया है और जल्दी ही इसका नोटिस भी कंपनी को भेज दिया जाएगा। वहीं सूत्रों का कहना है कि इस मामले में जल्दी ही एफआईआर भी दर्ज हो जाएगी। इस महीने निगम सदन की बैठक में भी यह मुद्दा लाया जा रहा है।
नगर निगम ने पिछले 6 सालों से कंपनी से न कोई लाइसेंस फीस ली है और न ही एडवर्टीजमेंट फीस। उल्टा कंपनी को रखरखाव के लिए हर महीने 12 हजार रुपये दिए जा रहे थे।
इस मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है और निगम के एक्सईएन गुरप्रीत सिंह से कई बार पूछताछ भी की जा चुकी है। अब विभागीय कार्रवाई में सामने आया कि कंपनी पर 13 साइट्स के लिए 1.40 करोड़ एडवर्टीजमेंट फीस बनती है।
ये है मामला
शहर में पब्लिक टॉयलेट के रखरखाव के लिए निगम ने 2007 में सेलवेल मीडिया सर्विसेज कंपनी को ठेका दिया था। टेंडर अलॉट करते वक्त कंपनी से न तो जरूरी लाइसेंस फीस ली गई और न ही विज्ञापन शुल्क।
टेंडर 2012 में खत्म हो गया और कंपनी को एक साल के लिए फिर एक्सटेंशन दे दी। इतना ही नहीं अब दोबारा उन्हें टेंडर अलॉट करने का भी फैसला हो गया है, जिसे पिछले साल एफएंडसीसी की मीटिंग में मंजूरी भी मिल गई थी।
कोट
सेलवेल कंपनी से 1.40 करोड़ रुपये वसूलने के प्रयास में निगम अफसर केवल खानापूर्ति कर रहे हैं। कंपनी पर इससे भी अधिक बकाया है। निगम अफसरों ने जनता के पैसे का दुरुपयोग किया है और इस बार हाउस मीटिंग में इस मामले को उठाया जाएगा।
सतिंदर सिंह, पार्षद