चंडीगढ़। दुनिया में कुछ भी वेस्ट नहीं है। मेहनत से उसे सर्वश्रेष्ट (बेस्ट) चीज बना सकते हो। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण हैं रॉक गार्डन निर्माता पद्मश्री नेकचंद। यह बात पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने सोमवार को नेकचंद की शताब्दी जयंती समारोह के उद्घाटन के दौरान कही। प्रशासन कटारिया ने रॉक गार्डन का एक चक्कर भी लगाया और नेकचंद द्वारा बनाए गए मूर्तियों को देखा। उन्होंने कहा कि नेकचंद एक साधारण व्यक्ति थे, लेकिन उन्होंने असाधारण काम किया है। शाम को मशहूर भजन गायक अनूप जलोटा ने मीरा हो गई मगन... सहित कई भजनों से समा बांधा। रॉक गार्डन में अब 15 दिसंबर तक रोजाना कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
कटारिया अधिकारियों के साथ रॉक गार्डन पहुंचे और नेकचंद को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान नेकचंद के बेटे अनुज सैनी भी उपस्थित रहे। कटारिया ने कहा कि देश में पहली बार किसी व्यक्ति ने फालतू पड़े सामान को इकट्ठा किया और बड़ी मेहनत से 18 साल तक काम करते रहे। वो इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एक छोटे कर्मचारी थे लेकिन, अपनी मेहनत ने रॉक गार्डन का निर्माण कर दिया। कहा कि ये इलाका बंजर था, उन्होंने छुपकर 1956-57 में काम शुरू किया और 1975-76 में यह गार्डन सबसे सामने आया।
बोले-एक आदमी के प्रयास से इतना बड़ा प्रोजेक्ट बन सकता है, हैरान करता है
प्रशासक ने कहा कि आज जो कोई भी चंडीगढ़ आता है वो रॉक गार्डन जरूर जाता है। एक आदमी के प्रयास से इतना बड़ा प्रोजेक्ट बन सकता है, यह हैरान करता है। सरकार ने भी नेकचंद का सम्मान किया और उन्हें पद्मश्री अवार्ड से नवाजा। उन्होंने कहा कि व्यक्ति मन में ठान ले तो वह कुछ भी कर सकता है। पूरे दिन रॉक गार्डन में कई कार्यक्रम हुए और शाम को अनूप जलोटा ने कार्यक्रम पेश किया। उन्होंने कई भजन सुनाएं। हालांकि इस दौरान लोगों की संख्या कम थी।
रॉक गार्डन में टूट रही मूर्तियों पर भी बोले प्रशासक
रॉक गार्डन में कई मूर्तियों को अब मरम्मत की जरूरत है। इसके अलावा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठ रहे थे। इस पर जब प्रशासक से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यहां पर एक विजिटिंग बुक लगनी चाहिए ताकि जो लोग आते हैं, वो उनकी बात उसमें लिख सकें। वो अगर लिखेंगे कि कोई कमी है या जो भी सुझाव उनकी तरफ से आएंगे, उस अनुसार प्रशासन काम करेगा। बता दें कि कुछ दिन पहले मुंबई से आई एक महीला ने रॉक गार्डन के अंदर वीडियो बनाई थी, जिसमें उन्होंने गार्डन के अंदर गंदा पानी और अव्यवस्था को दिखाया था। वीडियो में वह कहती नजर आ रही थीं कि जैसे उन्होंने सोचा था, वैसी व्यवस्था यहां उन्हें नहीं नजर आई।
12 दिसंबर को कंवर ग्रेवाल देंगे प्रस्तुति
रॉक गार्डन में 15 दिसंबर तक रोजाना सांस्कृतिक प्रस्तुतियां जैसे नट, बाजीगर और अन्य पारंपरिक कला प्रदर्शन होगा। कठपुतली शो और म्यूजिकल चेयर जैसे खेल होंगे और मिलेट मेला और फूड स्टॉल्स लगे रहेंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे कि वीरवार को सूफी गायक कंवर ग्रेवाल की प्रस्तुति होगी। वहीं, 15 दिसंबर को समापन दिवस पर पर्यटन विभाग द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम और पुरस्कार वितरण समारोह भी होगा। यह कार्यक्रम दिवंगत नेकचंद के योगदान को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इसमें शहरवासियों के साथ-साथ पर्यटकों को भी आमंत्रित किया गया है।
नेकचंद ने 1957 में रखी थी रॉक गार्डन की नींव, 1975 में खोजा गया तो 13 एकड़ में फैला हुआ था
नेकचंद रॉक गार्डन के निर्माता थे। उनका जन्म 15 दिसंबर 1924 को पाकिस्तान के शकरगढ़ में हुआ था, लेकिन भारत विभाजन के बाद उनका परिवार पंजाब में आ गया था। उन्होंने 1957 में रॉक गार्डन की नींव रखी। चंडीगढ़ के एक सुनसान कोने में अपने खाली समय में खराब सामग्रियों जैसे टूटी हुई टाइल्स, बोतलें, कांच, बर्तन और औद्योगिक कचरे का इस्तेमाल करते हुए अपनी कल्पना को मूर्त रूप दिया। यह गार्डन बिना किसी सरकारी मंजूरी के बनाया गया था और 1975 में जब यह खोजा गया, तो यह 13 एकड़ में फैला हुआ था।