भगवान के घर भी नोटबंदी की बाधा
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नोटबंदी का असर मंदिरों के चढ़ावों पर साफ दिखने लगा है। मंदिरों में चढ़ावा घटकर आधा रह गया है। मंदिर कमेटियों की ओर से भक्तों को कहा जा रहा है कि मंदिरों के दानपात्रों में पांच सौ या एक हजार रुपये के पुराने नोट न डालें। शिरडी साईं मंदिर में इस संबंध में पोस्ट भी चस्पा किया गया है।
श्री चैतन्य गौड़ीय मठ में चढ़ावा आधी रह गई है। मठ के प्रवक्ता जय प्रकाश गुप्ता का कहना है कि एक महीना के बाद दान पात्र खुलने पर डेढ़ से दो लाख के बीच चढ़ावा आता है। इस बार एक सप्ताह के बाद दानपात्र खोला गया तो मात्र 23 हजार रुपये निकले। जय प्रकाश गुप्ता का कहना है कि जब गोलक खोला गया तो पांच सौ और एक हजार के नोट पर एक भक्त ने लिखा कि भगवान अब आप खुद नोट बदलने के लिए लाइन में लगिये।
सेक्टर-29 स्थित शिरडी साई मंदिर का गोलक पिछले रविवार को खोला गया। इसमें करीब साढ़े सात लाख रुपये का नोट पांच सौ और एक हजार के नोट थे। जबकि मंदिर में महीने में करीब तीस लाख रुपये का चढ़ावा आता रहा है। इस मौके पर पुलिस की मौजूदगी में वीडियोग्राफी करवाई गई ताकि नोट जमा कराने में शिरडी साई मंदिर कमेटी को परेशानी न हो।
शिरडी साई मंदिर को संचालित करनेवाली संस्था शिरडी साई समाज के पदाधिकारी नलिन आचार्य ने बताया कि मंदिर में पांच सौ और हजार रुपये के नोट लेना बंद कर दिया गया है। साथ ही मंदिर के पोस्टर भी चस्पा कर दिया गया है कि कोई भी भक्त पुराने पांच सौ या एक हजार के नोट दान पात्र में न डालें। नलिन आचार्य ने बताया कि 25 दिसंबर को जब गोलक खुलेगा तब असली पता चलेगा कि नोट बंदी का असर कितना हुआ।