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तनाव न लेना कैंसर का सबसे बड़ा इलाज : बलविंदर कौर

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चंडीगढ़। दोस्तों किसी ने कहा है कि यह किसकी दुआओं ने सिर पर हाथ रखा है, हजारों मुश्किलें हैं फिर भी हाथ थाम रखा है। एक सुपर पावर है जो कहता है मैं हूं ना। हमें बस बिना तनाव लिए बी पॉजिटिव के मंत्र को समझते हुए उस सुपर पावर पर भरोसा करना है। फिर देखिए चमत्कार तय है। आपकी जिंदगी में आया बड़ा से बड़ा तूफान लौट जाएगा और हर तरफ खुशियां चहचहाएंगी। ये कहना है कैंसर को मात दे चुकीं मोहाली निवासी 67 वर्षीय बलविंदर कौर का, जो वर्ष 2015 में एक निजी अस्पताल में इलाज के बाद अब वह सामान्य जीवन जी रहीं हैं।
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बलविंदर ने बताया कि वह जबलपुर में साइंस की टीचर थीं। एक शाम स्कूल से लौटीं तो उन्हें कुछ परेशानी महसूस हुई। इस बारे में उन्होंने अपने घर के सदस्यों को बताया। सदस्यों ने बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लिया। डॉक्टरों ने लक्षणों के आधार पर उन्हें तत्काल टाटा मेमोरियल जाने की सलाह दी। टाटा मेमोरियल में जांच के बाद इस बात की पुष्टि हो गई कि बलविंदर सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित हैं। बलविंदर के लिए वह दौर बेहद तनाव भरा था, क्योंकि पति और एक बेटे के गुजरने के बाद उनकी जिंदगी में पहले ही उथल-पुथल मच चुका था, लेकिन छोटे बेटे और बेटी ने हिम्मत नहीं हारी। बच्चों की हिम्मत देख बलविंदर ने भी कैंसर को मात देने की ठानी और मोहाली में इलाज शुरू करा दिया। बलविंदर का कहना है कि कैंसर का खौफ इतना ज्यादा है कि मरीज न चाहते हुए तनाव में चला जाता है। हालांकि मेरा व्यक्तिगत अनुभव यह कहता है कि तनाव न लेना ही इसका सबसे बड़ा इलाज है। ईश्वर पर भरोसा और शीघ्र इलाज ही हम जैसे मरीजों को नया जीवन देने में सहायक है।
कोविड काल में कैंसर के 67422 मरीजों को मिला इलाज
पीजीआई रेडियोथेरेपी और ऑंकोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर सुष्मिता घोषाल ने बताया कि कोविड-19 के दौरान भी कैंसर के मरीजों का इलाज जारी रहा। 2019-20 और 2020-21 में कैंसर के 67442 नए और पुराने मरीजों को इलाज दिया गया। पीजीआई में कैंसर के इलाज की सभी आधुनिक तकनीक मौजूद हैं। प्रो. सुष्मिता के मुताबिक, महिलाओं में स्तन कैंसर और पुरुषों में सिर और गले का कैंसर तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए जागरूकता बेहद जरूरी है।
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किशोरियों को कर रहे जागरूक
किशोरियों में बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए परिवर्तन वेलफेयर एसोसिएशन 2018 से लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। संस्था की निदेशक रेणुका शर्मा ने बताया कि स्कूलों व विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर कार्यक्रम व शिविर आयोजित कर वह किशोरियों को जागरूक करने की कोशिश कर रही हैं। इस दौरान किशोरियों को पैप स्मीयर टेस्ट करवाने व इससे बचाव के लिए वैक्सीन लगवाने के प्रति जागरूक किया जाता है।
इन कारणों से हो सकता है कैंसर
सिगरेट या बीड़ी के सेवन से मुंह, गले, फेफडे़, पेट और मूत्राशय का कैंसर होता है। तंबाकू, पान, सुपारी, पान मसाला एवं गुटके के सेवन से मुंह, जीभ, खाने की नली, पेट, गले, गुर्दे और अग्नाशय (पैंक्रियाज) का कैंसर होता है। शराब के सेवन से श्वास नली, भोजन नली, और तालु में कैंसर हो सकता है
धीमी आंच व धुएं में पका भोजन (स्मोक्ड) और अधिक नमक लगा कर संरक्षित भोजन, तले हुए भोजन और कम प्राकृतिक रेशों वाला भोजन (रिफाइंड) सेवन करने से बड़ी आंत का कैंसर हो सकता है
कुछ रसायन और दवाइयों से पेट, यकृत (लीवर) मूत्राशय के कैंसर होता है। लगातार और बार-बार घाव पैदा करने वाली परिस्थितियों से त्वचा, जीभ, होंठ, गुर्दे, पित्ताशय और मूत्राशय का कैंसर हो सकता है
कम उम्र में यौन संबंध और अनेक पुरुषों से यौन संबंध से बच्चेदानी के मुंह का कैंसर हो सकता है
इलाज की आधुनिक तकनीक
- कीमो आईडी थेरेपी,
- इंटेंसिटी मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरेपी
- इमेज गाइडेड रेडिएशन थेरेपी
- थ्री-डायमेंशनल कंफर्मेशन रेडिएशन थैरेपी
हकीकत आप भी जान लें
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रत्येक वर्ष 1.6 करोड़ कैंसर से जुड़े नए मामले दर्ज किए जाते हैं। हर वर्ष लगभग 7,84,800 लोगों की मौत कैंसर के कारण होती है। भारत में होने वाले छह मुख्य कैंसर में स्तन कैंसर, मुंह का कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, फेफड़े का कैंसर, पेट का कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर शामिल हैं।
ये लक्षण हैं खतरनाक
- शरीर का वजन अचानक से कम या ज्यादा होना
- थकान और कमजोरी महसूस होना
- त्वचा के किसी हिस्से में बार-बार नील पड़ना
- त्वचा के नीचे गांठ महसूस होना
- लगातार एक महीने से खांसी या सांस लेने में कठिनाई होना
- त्वचा में बदलाव होना (जैसे त्वचा पर किसी गांठ के आकार या संरचना में कुछ बदलाव होना)
- त्वचा में जल्दी निशान पड़ जाना
- पाचन रोग जैसे दस्त या कब्ज होना
- निगलने में कठिनाई होना
- भूख कम लगना
- आवाज में बदलाव होना
- बार-बार बुखार होना
- रात को पसीना आना
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना
- घाव के ठीक होने की प्रक्रिया धीमी होना
- बार-बार संक्रमण होना
चंडीगढ़ में कैंसर की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक
चंडीगढ़ में एक लाख लोगों में औसत 96.6 पुरुष और 100.9 महिलाएं कैंसर की चपेट में हैं। यह आंकड़ा कैंसर की राष्ट्रीय औसत दर से अधिक है। राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 89.8 पुरुष और 90 महिलाओं का है। वहीं, मोहाली में एक लाख में 87.3 पुरुष और 96.2 महिलाएं कैंसर से पीड़ित हैं। संगरूर और मानसा में कैंसर रजिस्ट्री की घटनाओं की दर शहरी कैंसर रजिस्ट्रियों की तुलना में कम है। पुरुषों में फेफड़े और प्रोस्टेट का कैंसर तो महिलाओं में स्तन कैंसर फैल रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत में कैंसर के एक तिहाई से अधिक मामलों को रोका जा सकता है, लेकिन रोकथाम पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। आम कैंसर के लिए स्क्रीनिंग दर बहुत कम है। पंजाब में 30-49 आयु वर्ग की केवल 4त्न और 2त्न महिलाओं की क्रमश: सर्वाइकल और स्तन कैंसर के लिए जांच की गई, जबकि केवल 7.9 फीसदी आबादी में मुंह के कैंसर की जांच की गई। इसी तरह, हरियाणा में भी जांच दर कम है।
क्या कहते हैं अधिकारी
जितनी जल्दी कैंसर की पुष्टि कर इलाज शुरू कर देंगे, सफलता का चांस उतना ही बढ़ जाता है। मौजूदा समय में इलाज की लगभग सभी आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, इसलिए कैंसर के किसी भी प्रकार से संबंधित लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर की सलाह लें।
-डॉक्टर नरेंद्र भल्ला, फोर्टिस मोहाली में रेडिएशन ऑंकोलॉजी के निदेशक
इस वर्ष विश्व कैंसर दिवस की थीम ‘क्लोज द केयर गैप’ है। पीजीआई हमेशा से इस थीम पर काम करता आ रहा है, क्योंकि यहां चंडीगढ़ के अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड और लगभग देश के प्रत्येक हिस्से से कैंसर के मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। पीजीआई उन मरीजों को बेहतर इलाज देने के साथ ही कैंसर से बचाव के प्रति जागरूक करने का भी दायित्व निभा रहा है।
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-प्रो सुष्मिता घोषाल, पीजीआई रेडियोथेरेपी और ऑंकोलॉजी विभाग की प्रमुख
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