भ्रष्टाचार के मामले में फंसे रिटायर्ड कर्नल आरबीएस बिष्ट को आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) से कोई राहत नहीं मिली है। मंगलवार को एएफटी ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कोर्ट मार्शल के खिलाफ रियायत देने की मांग की थी।
यह याचिका हाई कोर्ट में पेंडिंग थी। हाई कोर्ट ने कोर्ट मार्शल के तो आदेश दे दिए थे, लेकिन उसकी सजा पर रोक लगा रखी थी। इसके बाद यह याचिका एएफटी में स्थानांतरित कर दी गई।
एएफटी की ओर से याचिका खारिज होने के बाद अब कोर्ट मार्शल में सुनाई गई सजा उन पर लागू होगी। यह कर्नल आरबीएस बिष्ट के लिए काफी बड़ा झटका है। कई वर्ष से यह केस पेंडिंग था।
मामले के अनुसार हिमाचल निवासी रिटायर्ड कर्नल बिष्ट 1991 में दप्पर डिपो में कमांडेट के पद पर तैनात थे। उन पर आरोप था कि उस वक्त उन्होंने खाद्य पदार्थों की खरीदारी में काफी अनियमियताएं बरती।
आरोप था कि कुछ चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए रेट से ज्यादा पैसे पर खरीदारी की गई। जो सामान खरीदा गया, उसकी रसीद भी गायब थीं। इसके अलावा उन पर सस्ता और घटिया सामान खरीदने का भी आरोप लगाया गया था। साल 1992 में जब यह मामला सामने आया तो उनके खिलाफ कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश जारी हुए।
कोर्ट आफ इंक्वायरी के खिलाफ कर्नल बिष्ट हाई कोर्ट गए। उनका कहना था कि सभी आरोप निराधार हैं। हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आर्मी को कोर्ट ऑफ मार्शल के आदेश जारी किए।
साथ ही यह भी कहा कि कोर्ट मार्शल की सजा तब तक लागू न की जाए जब तक इस याचिका पर सुनवाई न हो। बाद में इस याचिका को एएफटी में ट्रांसफर कर दिया।
एएफटी में मंगलवार को सुनवाई हुई और याचिका को खारिज कर दिया गया। अब कोर्ट ऑफ मार्शल के दौरान जो सजा मुकरर्र की गई थी, उसे लागू किया जाएगा।