हरियाणा में जिला परिषद और ब्लाक समिति के नव निर्वाचित सदस्य निर्दलीय सदस्य ही नहीं बल्कि पार्टी के सिंबल पर चुनाव जीतने वाले भी बेरोक टोक किसी भी दल में आ जा सकते हैं। इससे उनकी सदस्यता पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। दरअसल, सदस्यों को दिए गए निर्वाचन प्रमाण पत्र में न तो प्रत्याशी के लिए राजनीतिक दल का जिक्र है और न ही किसी को निर्दलीय बताया गया है। केवल इतना लिखा गया है कि संबंधित व्यक्ति जिला और ब्लाक समिति का सदस्य निर्वाचित हुआ है। हरियाणा पंचायती राज संस्थाओं में फिलहाल ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि नए सदस्य दल बदल न कर सकें।
यह जानकारी पंजाब एवं हरियाणा के एडवोकेट हेमंत कुमार ने दी। उन्होंने कहा कि आधिकारिक रूप से किसी भी राजनीतिक दल का एक भी प्रत्याशी निर्वाचित नहीं हुआ है। एडवोकेट हेमंत ने बताया कि जब तक प्रदेश विधानसभा द्वारा हरियाणा के पंचायती राज कानून में राजनीतिक दलों का उल्लेख और राजनीतिक दलों के पार्टी चिह्न पर चुनाव करवाने बारे में स्पष्ट उल्लेख/प्रावधान नहीं डाला गया है।
हेमंत का कानूनी मत है कि बेशक देश के संविधान के अनुच्छेद 243 (के) में आयोग के पास पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के अधीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण का अधिकार है, परंतु आयोग प्रदेश विधानसभा द्वारा बनाए कानून के प्रावधानों अनुसार ही चुनाव करवा सकता है।
हरियाणा पंचायती राज कानून की धारा 212 और हरियाणा पंचायती राज निर्वाचन नियमों के नियम 33, जिसके अंतर्गत आयोग द्वारा उसे प्रदान शक्तियों का प्रयोग कर मौजूदा लागू 2014 का चुनाव चिन्ह आवंटन आदेश बनाया गया। उक्त प्रावधानों में राजनीतिक दलों और पार्टी चिह्न का नहीं बल्कि केवल चिह्न का उल्लेख है।
एडवोकेट हेमंत का कहना है कि पंचायती राज कानून में दल-बदल विरोधी प्रावधान डाले बगैर राजनीतिक दलों के पार्टी चिह्न पर चुनाव करवाने का कोई औचित्य नहीं बनता। चुनाव से पहले भी उन्होंने इस संबंध में आयोग को पत्र लिखा था।
अब यह देखने लायक होगा कि आगामी कुछ दिनों में जब राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचित सदस्यों के नामों की नोटिफिकेशन जारी की जाएगी तो क्या उसमें उनके नामों के साथ उनके संबंधित राजनीतिक दल के नाम का उल्लेख किया जाता है या नहीं क्योंकि निर्वाचन प्रमाण पत्र पर ऐसा उल्लेख नहीं है।