शहर में अपनी सब्जी मंडी बंद करने को लेकर पिछले 15 दिन से मंडी बोर्ड और दुकानदारों के बीच चल रहा विवाद रविवार को सुलझ गया। मंडी बोर्ड ने दुकानदारों को फेज-11 की मंडी को छोड़कर सभी जगह, जहां शहर में मंडियां लगती थीं, को लगाने की मंजूरी दे दी है।
मंडी बोर्ड के इस फैसले को दुकानदारों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के बाद रविवार को दोपहर में फेज-11 में लगने वाली मंडी के दुकानदार नई बनी सेक्टर-65ए की मंडी में दुकान लगाकर बैठ गए। इस मौके पर दुकानदारों ने खुशी में नारे लगाए गए और लड्डू भी बांटे।
रेहड़ी-फड़ी एसोसिएशन के प्रधान सोहन सिंह ने भाजपा के जिला प्रधान का धन्यवाद करते हुए बताया कि मंडी बोर्ड द्वारा आज ही उनको अपने पास खरड़ दफ्तर में बुलाकर कहा गया कि शहर में लगती मंडिया बंद नहीं होंगी।
सिर्फ फेज-11 में रविवार और बुधवार को लगने वाली मंडी को एसी मंडी में शिफ्ट कर दिया गया है। इस पर एसोसिएशन ने सर्वसमति से स्वीकर कर लिया। ध्यान रहे की शहर में दो मंडियां लगती हैं, एक किसान मंडी और दूसरी रेहड़ी-फड़ी वालों की मंडी।
दुकानदारों का विरोध रंग लाया
पिछले महीने की 22 फरवरी को मंडी बोर्ड द्वारा मंडिया बंद करने के लिए कार्रवाई शुरू की थी। इसके विरोध में दुकानदारों ने संघर्ष शुरू कर दिया गया था। संघर्ष में भाजपा के जिला प्रधान सुखविंदर सिंह गोल्डी भी शामिल हुए थे। इसके बाद गोल्डी द्वारा समय-समय पर अधिकारियों से बातचीत की गई और आखिरकार मंडी बोर्ड द्वारा रविवार को दुकानदारों द्वारा किए जा रहे संघर्ष का खत्म कराकर ही दम लिया।
अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
शहर में लगने वाली किसान मंडी को बंद किए जाने को लेकर मंडी बोर्ड द्वारा शुरू की गई कार्रवाई के बाद दुकानदारों और लोगों में इस कार्रवाई को लेकर काफी परेशानी थी।
इस संबंध में अमर उजाला द्वारा एक मुहिम शुरू की गई थी जिसमें मंडी के दुकानदारों के अलावा मंडी में सब्जी खरीदने आने लोगों और व्यापार मंडल, एडवोेकेट एवं पार्षदों साहित कई लोगाें के साथ मिलकर मुद्दे को उठाया और रविवार को बोर्ड द्वारा आखिरकार मंडी बंद करने की कार्रवाई बंद कर दी गई।