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Chandigarh News: नेकी की दीवार नहीं, शर्म की दीवार

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चंडीगढ़। जरूरत नहीं है तो छोड़ो, जरूरत है तो ले लो... जब सितंबर 2016 में इसे शहर में शुरू किया गया तो नेकी की दीवार का यही नारा था। इसका मकसद था कि लोग अतिरिक्त कपड़े, जूते और सामान उन जरूरतमंदों तक पहुंचा सकें जिन्हें इसकी वास्तव में जरूरत है। विभिन्न स्कूलों और एनजीओ की मदद से नगर निगम ने इस पहल को कई जगहों पर लागू किया जिनमें सेक्टर- 26, 18 और 49 प्रमुख थे। कभी नेकी का प्रतीक रही यह दीवार आज नर्क का रूप ले चुकी है।
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आज इन दीवारों की हालत देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा। सेक्टर- 49 कम्युनिटी सेंटर के बाहर दीवार बनी है। यहां कपड़ों के साथ-साथ टूटी चप्पलें, फटे जूते और बेकार सामान के ढेर लगे हुए हैं। बारिश और धूप में सड़ते इन कपड़ों से बदबू फैल रही है। सफाई के नाम पर नगर निगम के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।


विडंबना यह है कि इलाके के पार्षद राजिंदर कुमार शर्मा का रोज आना-जाना होगा जिसके बावजूद यह गंदगी नजरअंदाज की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में लोग उत्साह से कपड़े छोड़ते थ, पर अब यहां कूड़ा डालना आम बात हो गई है। किसी को यह परवाह नहीं कि समाज के नाम पर यह दीवार अब शर्म का कारण बन गई है। शहर में सफाई और जागरूकता की कई बातें होती हैं, पर नेकी की दीवार की यह दुर्दशा बताती है कि असली गंदगी सिर्फ सड़कों पर नहीं, हमारी सोच में भी बस गई है।
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