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Haryana News: MIS पोर्टल पर 2149 स्कूलों में पहली कक्षा में एक भी बच्चा दाखिल नहीं, घिरा शिक्षा निदेशालय

Tue, 21 Jun 2022 03:08 PM IST
ajay kumar यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

प्राथमिक शिक्षक संघ इस मुद्दे पर बीते 21 मई को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी. उमाशंकर के साथ बैठक में पीपीपी की अनिवार्यता के कारण आ रही दिक्कतों को उठा चुका है। हजारों बच्चों ने दाखिला के लिए ऑनलाइन फार्म भर रखे हैं लेकिन परिवार आईडी दर्ज न होने पर एमआईएस पोर्टल पर पंजीकरण ही नहीं हो रहा।
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स्कूल बैग टांगे बच्चे (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एमआईएस (सूचना प्रबंधन प्रणाली) पोर्टल के अनुसार हरियाणा के 2149 सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में एक भी दाखिला नहीं हुआ है। इन स्कूलों में पहली कक्षा में बच्चों की संख्या पोर्टल शून्य दिखा रहा है। दाखिल बच्चों की संख्या पोर्टल पर न चढ़ पाने के कारण शिक्षा निदेशालय घिरा हुआ है। दाखिलों के लिए इस बार लागू की गई नई शर्तों और परिवार पहचान पत्र की अनिवार्यता के कारण बच्चों के अभिभावकों के साथ ही स्कूल शिक्षक भी परेशान हैं।  

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प्रदेश में 166 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जिनमें नियमित शिक्षक न होने के कारण स्कूलों में दाखिलों के लिए किसी को अधिकृत ही नहीं किया गया है। परिवार पहचान पत्र की आईडी दाखिला में अनिवार्य होने की शर्त जोड़ने से चाहकर भी बच्चों के दाखिले एमआईएस पोर्टल पर नहीं चढ़ पा रहे। मौलिक शिक्षा निदेशक अंशज सिंह ने दावा किया है कि प्राथमिक स्कूलों में इस बार रिकॉर्ड तोड़ दाखिले हुए हैं। बच्चे ग्रीष्मावकाश के बाद स्कूलों में भी आएंगे, असमंजस की स्थिति पोर्टल पर डाटा अपडेट न होने के कारण बनी है। 

उधर, प्राथमिक शिक्षक संघ इस मुद्दे पर बीते 21 मई को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी. उमाशंकर के साथ बैठक में पीपीपी की अनिवार्यता के कारण आ रही दिक्कतों को उठा चुका है। हजारों बच्चों ने दाखिला के लिए ऑनलाइन फार्म भर रखे हैं लेकिन परिवार आईडी दर्ज न होने पर एमआईएस पोर्टल पर पंजीकरण ही नहीं हो रहा। दर्जनों शिकायतों के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग अप्रैल से लेकर अब तक इस समस्या का समाधान नहीं कर पाया है।

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ये है एमआईएस पोर्टल
शिक्षा विभाग ने हर बच्चे का रिकॉर्ड रखने के लिए इस पोर्टल को बनाया है। इसमें दाखिले के समय बच्चे का नाम, जन्मतिथि, आधार नंबर, स्वास्थ्य संबंधी सूचना, जाति, छात्रवृत्ति भुगतान के लिए बैंक अकाउंट नंबर, माता-पिता की पूरी डिटेल पते सहित भरकर एक विशिष्ट नंबर जारी किया जाता है। इसे स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन नंबर कहते हैं। इसमें बच्चे की शिक्षा का सारा विवरण दर्ज होता रहता है। इस पोर्टल पर बच्चे का रजिस्ट्रेशन होने के बाद ही विभाग उसे अपना अधिकृत छात्र मानता है। यह नंबर होने पर ही बच्चों को स्कूल शिक्षा विभाग की सभी योजनाओं का लाभ मिलता है।

पीपीपी ने फंसा दिया पेच
पीपीपी-परिवार पहचान पत्र में बच्चे का नाम, जन्मतिथि उसके आधार कार्ड से ली जाती है। पहली बार प्रथम कक्षा में दाखिला लेने वाले बच्चों के आधार कार्ड में उनके नाम की जगह बेबी ऑफ मां या बाप का नाम है। इस कारण एमआईएस पोर्टल उस फैमिली आईडी को न तो सत्यापित कर रहा, न बच्चे का नाम उठा रहा है। पीपीपी के इस चरण के पूरा होने के बाद ही दाखिले के अगले चरणों को पूरा किया जा सकता है।

एमआईएस पर एक भी दाखिला न होने वाले स्कूलों की संख्या     
अंबाला में 165, भिवानी में 118, चरखी दादरी में 74, फरीदाबाद में 52, फतेहाबाद में 57, गुरुग्राम में 97, हिसार में 110, झज्जर में 88, जींद में 55, कैथल में 70, करनाल में 116, कुरुक्षेत्र में 110, महेंद्रगढ़ में 179, मेवात में 32, पलवल में 107, पंचकूला में 121, पानीपत में 32, रेवाड़ी में 153, रोहतक में 42, सिरसा में 126, सोनीपत में 95, यमुनानगर में 150।

समस्या हल न होने से आएंगी अनेक दिक्कतें: संघ 
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव तरुण सुहाग, शिक्षक नेता सुनील बास ने कहा कि फैमिली आईडी की अनिवार्यता खत्म न होने से अनेक समस्याएं आएंगी। विभाग पोर्टल पर दर्ज विद्यार्थी संख्या अनुसार ही पदों का रेशनेलाइजेशन करेगा। इसके साथ ही दोहरे पंजीकरण नंबर जारी होने की भी आशंका है। सरकार इस समस्या का समाधान जल्द निकाले। 2100 से अधिक स्कूलों में एक भी बच्चे का दाखिला पोर्टल पर न चढ़ पाना बड़ी तकनीकी खामी है। 
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