चंडीगढ़ स्थित उत्तर भारत की एकमात्र रेलवे मैकेनाइज लांड्री को अपग्रेड किया जाएगा, ताकि लोगों को अच्छी साफ सुथरे बिस्तर उपलब्ध हों। इसमें जहां नई आधुनिक मशीनें इंस्टॉल होंगी, वहीं धुलाई के बाद बिस्तरों की क्वालिटी भी खराब नहीं होगी। अब तक इस लांड्री में सिर्फ छह ट्रेनों के बिस्तरों की धुलाई होती थी। मगर अब पंजाब, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ और राजस्थान तक फैले अंबाला मंडल की अन्य ट्रेनों के बिस्तरों की धुलाई भी इस लांड्री में शुरू होगी।
धुलाई की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
इस लांड्री को अगस्त 2016 में चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से थोड़ा दूर स्थापित किया गया था। करीब 75 लाख की लागत से इसे तैयार किया गया था। बाद में इसमें एक बॉयलर, दो वॉशर और दो ड्रायर मशीनें इंस्टॉल की गईं। इसकी देखरेख का जिम्मा अंबाला रेल मंडल का है। हालांकि , अंबाला रेल मंडल का दावा है कि यहां कपड़े धुलाई की क्वालिटी बेहतरीन है, लेकिन कई यात्रियों ने धुलाई के बाद कपड़ों खासकर कंबल की क्वालिटी खराब होने की शिकायतें रेलवे से की थी।
खरीदी जाएंगी इंपोर्टेड आटोमेटिक मशीनें
इस लांड्री में छह ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाली बेडशीट, पिलो कवर, परदे, फेस टॉवल और कंबल की धुलाई हो रही है। लेकिन अब इस लांड्री में नया इंपोर्टेड आटोमेटिक स्टीम बॉयलर, फोल्डर व अन्य मशीनें इंस्टाल करने की योजना है। इस दौरान अब धुलाई के बाद बिस्तर फोल्ड होकर मशीन से बाहर निकलेंगे और सीधे ट्रेनों में भेजे जाएंगे।
न हटा दाग, तो बिस्तर हटेंगे
अपग्रेड होने वाली इस मैकेनाइज लांड्री में धुलाई के लिए आने वाले बिस्तरों की मैल और दाग हटाने के लिए कपड़ों के भार के हिसाब से डोजर सिस्टम से केमिकल मशीनों में छोड़ा जाता है। लेकिन कई बार बिस्तर पर ऐसे गहरे दाग होते हैं, जो केमिकल से भी नहीं हटते, तो उसे मैनुअल धोया जाएगा। दाग न हटने पर उस बिस्तर को हटा दिया जाएगा। दाग वाला बिस्तर ट्रेनों में नहीं भेजा जाएगा।
मैकेनाइज लांड्री को अपग्रेड करने के बाद बिस्तरों की क्वालिटी खराब होने की शिकायतें खत्म हो जाएंगीं। पिछले दिनों एजीएम ने भी इस लांड्री का निरीक्षण किया था। अब कुछ नई आटोमेटिक मशीनें लांड्री में इंस्टाल की जाएंगी। उसके बाद मंडल की अन्य ट्रेनों के बिस्तर भी यहीं धुलेंगे।
- दिनेश कुमार, डिविजनल रेलवे मैनेजर, अंबाला रेल मंडल।