चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा में लगने वाले प्लांट को सही ठहराने के लिए शहर के मेयर अनूप गुप्ता ने झूठ बोल दिया। नगर निगम की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में मेयर ने कहा है कि नॉर्थ गोवा का प्लांट रिहायशी इलाके से महज 100 मीटर दूर है। इसके आगे करीब 50 हजार लोग रहते हैं जबकि प्लांट का दौरा कर चुके पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी का कहना है कि प्लांट रिहायशी इलाके से करीब डेढ़ किमी दूर है। मेयर जिसे रिहायशी इलाका बता रहे हैं, वह कंपनी ने अपने कुछ कर्मियों के लिए बनाए हैं। प्लांट का एरियल व्यू भी मेयर की बात को गलत साबित कर रहा है।
मेयर अनूप गुप्ता ने कहा है कि गोवा के दोनों प्लांट तत्कालीन डंपिंग ग्राउंड पर स्थित हैं। वहां पड़े पुराने कचरे का बायोरेमेडिएशन किया गया। इसके बाद उसी भूमि पर प्लांट स्थापित किया गया है। मेयर ने कहा कि दोनों प्लांट रिहायशी इलाके के करीब है। उन्होंने दावा कि नॉर्थ गोवा के प्लांट की दीवार से 100 मीटर से ही रिहायशी इलाका शुरू होता है, जबकि साउथ गोवा के प्लांट की दीवार से महज 20 मीटर से ही रिहायशी इलाका है।
एरियल व्यू ने खोला राज
वहीं पार्षदों और एरियल व्यू के अनुसार नॉर्थ गोवा का प्लांट रिहायशी इलाके से दूर है। साउथ गोवा में रिहायशी इलाके पास हैं लेकिन यह प्लांट भी सिर्फ 100 टीडीपी का है, उसमें भी पार्षद गाबी के अनुसार 15 टीडीपी ही कचरा प्रोसेस किया जा रहा है। मेयर ने कहा कि दौरे में उन्होंने पाया है कि कचरे को प्रोसेस कर खाद बनाई जा रही है और वहां पर बदबू भी नहीं है।
दौरे के बाद भाजपा पार्षदों ने गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत से भी मुलाकात की। हालांकि, कांग्रेस के पार्षदों ने इस मुलाकात से दूरी बनाए रखी। डड्डूमाजरा के नौ लोगों ने भी पार्षदों के साथ प्लांट का दौरा किया। वहां एक ग्रुप फोटो भी हुई।
गोवा के दोनों प्लांट में बनाई जाती है बिजली
नगर निगम के पार्षदों और अधिकारियों ने गुरुवार को साउथ गोवा के 100 टीडीपी के प्लांट का दौरा किया। बुधवार को नॉर्थ गोवा के 250 टीडीपी के प्लांट का दौरा किया था। ये प्लांट राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (नीरी) के सुझाव पर चलाए जा रहे हैं। दोनों प्लांट अपने गीले कचरे को प्रोसेस करके कंप्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन करते हैं, जिसका उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। प्लांट की प्रणाली और प्रक्रिया को समझने और संयंत्र में अपनाई जा रही अच्छी तकनीक से सीखने के लिए ही पार्षद और अधिकारी गोवा के टूर पर गए हैं। निगम की आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने कहा कि उत्पादित बायोगैस का उपयोग या तो सीएनजी या बिजली का उत्पादन करने के लिए किया जा सकता है।
15 टीडीपी कचरे को प्रोसेस कर रहे प्लांट को पार्षदों ने देखा
सभी पार्षद व अधिकारियों ने साउथ गोवा के वोडलेमोल काकोरा स्थित गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट का दौरा किया। इस प्लांट को नीरी के सुझाव पर वसुधा वेस्ट ट्रीटमेंट प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से चलाया जा रहा है। प्लांट के दौरे के बाद कांग्रेस के पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने बताया कि इस प्लांट की क्षमता 100 टीडीपी है, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 15 टीडीपी कूड़े को ही रोजाना प्रोसेस किया जा रहा है। इसमें से 8 टीडीपी गीला कचरा और छह टीडीपी सूखा कचरा है। उन्होंने बताया कि यह प्लांट करीब 12 एकड़ में फैला हुआ है और चार लाख लोगों की आबादी को कवर करता है। इसके अंतर्गत 25 पंचायत और एक नगर निगम आता है। बताया कि कचरे से जो बायो सॉयल निकलता है, उसे प्लांट की तरफ से स्थानीय किसानों को पांच रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि यह प्लांट भी घनी आबादी से दूरी पर स्थित है।
अरुण सूद ने किया टूर पर गए अधिकारियों का बचाव
नगर निगम के 11 अधिकारियों के गोवा के स्टडी टूर पर जाने को लेकर आम आदमी पार्टी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल उठाया था। गुरुवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद ने अधिकारियों का बचाव किया और कहा कि यदि अधिकारी खुद तजुर्बा नहीं करेंगे तो आने वाले समय में प्लांट को कैसे चलाएंगे, इसलिए गोवा का टूर नगर निगम के अधिकारियों सहित पार्षदों के लिए अति आवश्यक था। आने वाले समय में चंडीगढ़ के प्लांट को निगम के अधिकारियों ने ही चलाना है।