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Chandigarh: भारतीयों में थायरॉइड के नॉर्मल वैल्यू की तलाश करेगा पीजीआई, आसान हो जाएगा इलाज

Thu, 25 May 2023 09:31 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीजीआई का इंडोक्राइनोलॉजी विभाग देश के पांच शीर्ष संस्थानों के साथ मिलकर थायरॉइड हार्मोन के नॉमर्ल रेंज की तलाश करेगा। इसके लिए डोर टू डोर सर्वे कर नॉर्मल लोगों से नमूना लेकर उसमें थायरॉइड के वैल्यू की जांच की जाएगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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अब तक देश में जिस वैल्यू रेंज के आधार पर थायरॉइड के मरीजों का इलाज हो रहा है, वे पश्चिमी देशों की जनता का वैल्यू है। उस मानक के आधार पर यहां के मरीजों की न तो सटीक डाइग्नोसिस होती है न ही इलाज। इसलिए थायरॉइड के मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए अब देश की जनता में इस मर्ज के नॉर्मल वैल्यू की तलाश की जाएगी। पीजीआई इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख व इंडोक्राइनोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. संजय भडाडा ने यह जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि पीजीआई का इंडोक्राइनोलॉजी विभाग देश के पांच शीर्ष संस्थानों के साथ मिलकर थायरॉइड हार्मोन के नॉमर्ल रेंज की तलाश करेगा। इसके लिए डोर टू डोर सर्वे कर नॉर्मल लोगों से नमूना लेकर उसमें थायरॉइड के वैल्यू की जांच की जाएगी। यह योजना को लगभग एक साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने बताया कि भारतीयों का जीन विदेशियों से अलग है। ऐसे में जब हमारे पास अपने देश के लोगों के थायरॉइड के नॉर्मल रेंज की जानकारी होगी तो दोनों ही स्तर पर बेहतर परिणाम प्राप्त होगा।

डिलीवरी के बाद खुद न बंद करें दवा
प्रो. संजय ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं में थायरॉइड हॉर्मोन का स्तर असंतुलित हो जाता है उन्हें दवाई देनी पड़ती है। लेकिन ज्यादातर महिलाएं डिलीवरी के बाद उसे डॉक्टर की सलाह के बिना ही बंद कर देती हैं, ऐसा नहीं करना चाहिए। इससे दूध बनना कम होने लगता है, क्योंकि थायरॉइड हार्मोन का संबंध दूध बनने की प्रक्रिया से भी है। इसलिए डिलीवरी के बाद जांच कराए। डॉक्टर के निर्देशानुसार धीर धीरे दवा की डोज कम करें। प्रो. संजय का कहना है कि युवतियों को आयरन की कमी से बचना जरूरी है, क्योंकि आयरन की कमी भी उन्हें थायरॉइड का शिकार बना सकती है।
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ऐसे करें बचाव
-पर्याप्त आयोडीन और आयरन के सेवन के साथ स्वस्थ आहार लें।
-धूम्रपान और शराब के सेवन से परहेज करें।
- तनाव प्रबंधन, पर्याप्त नींद लेना और विटामिन डी के पर्याप्त स्तर को बनाए रखने के लिए धूप लें।
- थायरॉइड फंक्शन की नियमित जांच और निगरानी महत्वपूर्ण है।

थायरॉइड के प्रकार
हाइपोथायरायडिज्म
हाइपरथायरायडिज्म
गण्डमाला (बढ़ी हुई थायरॉयड ग्रंथि)
हाशिमोटो के थायरॉयडिटिस
थायरॉइड  कैंसर

थायरॉइड क्या है.. जानना जरूरी
थायरॉइड एडम्स एप्पल के ठीक नीचे, गर्दन में स्थित एक छोटी ग्रंथि है। यह हार्मोन पैदा करता है जो शरीर के चयापचय को नियंत्रित करता है। यह भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया है। ये हार्मोन हृदय गति, शरीर का तापमान और ऊर्जा के स्तर को प्रभावित करता है। थायरॉइड ग्रंथि को मस्तिष्क में पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जो थायरॉइड-उत्तेजक हार्मोन (टीएसएच) को रिलीज करता है ताकि थायरॉइड को अपने हार्मोन का अधिक या कम उत्पादन करने के लिए कहा जा सके। शरीर में कई अंगों और प्रणालियों के समुचित कार्य के लिए थायरॉइड हार्मोन आवश्यक हैं और थायरॉइड की खराबी से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
 
थायरॉइड के लक्षण
थकान और कमजोरी, वजन बढ़ना या कम होना, भूख में परिवर्तन, बालों का झड़ना या पतला होना, शुष्क त्वचा, ठंडक या गर्मी का अहसास होना, मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन, मूड में बदलाव, जैसे चिंता या अवसाद, अनियमित मासिक धर्म, नींद न आना, गर्दन में सूजन और निगलने या बोलने में कठिनाई।
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