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गैर-संचारी रोगों की रजिस्ट्री में खुलासा: कैंसर और हार्ट के मरीज हैं... फिर भी तंबाकू-सिगरेट की लत हावी

Mon, 15 Dec 2025 08:49 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

एनसीडी रजिस्ट्री से जुड़े पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रो. जेएस ठाकुर के अनुसार कैंसर से पीड़ित पुरुष मरीजों में 34.2 प्रतिशत ने कभी न कभी तंबाकू का सेवन किया है जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 2.4 प्रतिशत रहा।
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धूम्रपान से फेफड़ों को खतरा - फोटो : istock
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विस्तार
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चंडीगढ़ में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) से पीड़ित मरीजों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। कैंसर, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों के पीछे तंबाकू और शराब की बड़ी भूमिका सामने आई है। चंडीगढ़ एनसीडी रजिस्ट्री के आंकड़ों से साफ है कि बीमारियों और नशे की आदतों के बीच सीधा और गहरा संबंध है।

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जुलाई 2018 से दिसंबर 2021 के बीच रजिस्टर्ड मरीजों के डाटा का अध्ययन बताता है कि कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, एप्लास्टिक एनीमिया और युवाओं में बढ़ रही डायबिटीज जैसी बीमारियों के मामलों में तंबाकू और शराब प्रमुख जोखिम कारक बन चुके हैं।

एनसीडी रजिस्ट्री से जुड़े पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रो. जेएस ठाकुर के अनुसार कैंसर से पीड़ित पुरुष मरीजों में 34.2 प्रतिशत ने कभी न कभी तंबाकू का सेवन किया है जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 2.4 प्रतिशत रहा। चिंता की बात यह है कि वर्तमान में भी 35.9 प्रतिशत पुरुष कैंसर मरीज तंबाकू का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्मोकलेस यानी चबाने वाले तंबाकू का उपयोग करने वाले पुरुष मरीजों की हिस्सेदारी 4.6 प्रतिशत दर्ज की गई।
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हृदय रोगियों में हालात और गंभीर नजर आए। हार्ट अटैक से पीड़ित पुरुष मरीजों में 31.7 प्रतिशत ने तंबाकू सेवन की पुष्टि की जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 4.9 प्रतिशत रहा। वहीं, कभी तंबाकू का सेवन कर चुके पुरुष हार्ट मरीजों की संख्या 63 प्रतिशत तक पहुंच गई जो हृदय रोगों में तंबाकू की भूमिका को बताता है।

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स्ट्रोक और शराब सेवन के आंकड़े भी डराने वाले

प्रो. ठाकुर के मुताबिक स्ट्रोक के मामलों में भी तंबाकू का असर साफ दिखता है। पुरुष स्ट्रोक मरीजों में 38.3 प्रतिशत तंबाकू का सेवन कर चुके हैं जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 1.4 प्रतिशत रहा। शराब से जुड़े आंकड़े भी कम चिंताजनक नहीं हैं। कैंसर से पीड़ित 46.1 प्रतिशत पुरुष और हार्ट मरीजों में 50 प्रतिशत ने शराब पीने की बात स्वीकार की है। बड़ी संख्या में मरीज ऐसे भी हैं जो बीमारी के बावजूद अभी तक शराब पी रहे हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी

एनसीडी रजिस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े चेतावनी हैं। तंबाकू और शराब अब सिर्फ जीवनशैली की आदतें नहीं रह गई हैं बल्कि जानलेवा बीमारियों की जड़ बन चुकी हैं। यदि समय रहते प्रभावी रोकथाम, सख्त नीतियां और व्यापक जन-जागरूकता नहीं अपनाई गई तो आने वाले वर्षों में गैर-संचारी रोगों का खतरा और भी गहराएगा।
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