दीपावली का जश्न मनाने में लोग इतने मग्न हो जाते हैं कि वे पटाखे पर पटाखे फोड़ते रहते हैं। जश्न में वे पटाखों के प्रयोग से होने वाले नुकसान की भी परवाह नहीं करते।
इसका नतीजा यह होता है कि दीवाली की रात सिटी में ध्वनि प्रदूषण बहुत बढ़ जाता है। आंकड़े कहते हैं कि दिवाली पर हर साल ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इससे कई बीमारियां भी बढ़ रही हैं।
कई बीमारियों मौके पर ही पता चल जाती हैं तो कई का लंबे समय बाद। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार पटाखों के खिलाफ काफी अवेयरनेस प्रोग्राम हुए हैं। इससे लगता है कि ध्वनि प्रदूषण की मात्रा कम हो सकती है।
पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के इन्वायरमेंट हेल्थ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रविंदर खैवाल ने बताया कि यदि व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरण को सुरक्षित रखने की अपनी जिम्मेदारी समझे तो ध्वनि प्रदूषण से काफी हद तक निजात पाई जा सकती है।
यहां बढ़ रहा है ध्वनि प्रदूषण
सेक्टर-22, पीयू, मनीमाजरा, कामर्शियल जोन
ये हो सकती हैं बीमारियां
ध्वनि प्रदूषण से कई बीमारियां भी हो सकती है। साथ ही कई हादसों का भी बुलावा देते हैं। कई बार लोग सड़क पर पटाखे फोड़ते हैं। इससे एक्सीडेंट होने के खतरे होते हैं। इसके अलावा ध्वनि प्रदूषण से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। लगातार तेज धमाके से हाइपर टेंशन बढ़ता है। हार्ट की बीमारियां बढ़ती है। लोगों की नींद में खलल पड़ता है।
ऐसे कम करें ध्वनि प्रदूषण
लाइसेंसधारी दुकानों से पटाखे खरीदने चाहिए।जितना हो सके कम आवाज वाले पटाखे होने चाहिए।पटाखे पार्क या खुली जगह में फोड़ने चाहिए।कभी भी ड्रम व कंटेनर में पटाखे नहीं फोड़ने चाहिए।शपथ लें कि कम अवाज वाले पटाखे फोड़ने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगे