हिमाचल घूमने जाने वालों ट्राइसिटी के लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। रोहतांग जाने वाले टैक्सी ऑपरेटरों और निजी वाहन चालकों से फिलहाल पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क नहीं लिया जाएगा।
सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस मामले में फैसला अगली सुनवाई तीन जुलाई तक सुरक्षित रखा है। तब तक एनजीटी का पुराना फैसला यथावत ही रहेगा। अब तय तिथि तक टैक्सी ऑपरेटरों को प्रति चक्कर एक हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक शुल्क नहीं देना पड़ेगा।
उधर, हिम आंचल टैक्सी ऑपरेटर यूनियन की ओर से प्रतिदिन रोहतांग जाने वाले वाहनों की संख्या बढ़ाने को लेकर दी गई अर्जी पर भी तीन जुलाई को ही कोई निर्णय होगा। फिलहाल रोजाना एक हजार वाहन ही रोहतांग जाएंगे।
मामले पर अगली सुनवाई 3 जुलाई को
29 मई को जस्टिस यूडी साल्वी की अध्यक्षता वाली एनजीटी की पीठ ने रोहतांग जाने वाले टैक्सी ऑपरेटरों को राहत देते हुए 8 जून तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क पर रोक लगा दी थी।
इससे पहले पेट्रोल वाहनों से 1000 रुपये, पांच सीटर डीजल वाहनों से 2500 रुपये और छह सीट से अधिक डीजल वाहनों से 5000 रुपये वसूले किए जाते थे।
हिम आंचल टैक्सी ऑपरेटर यूनियन मनाली के महासचिव मकर ध्वज शर्मा ने दिल्ली से फोन पर बताया कि चार जजों की बैंच ने बहस के बाद अगली सुनवाई 3 जुलाई को तय की है। तब तक पर्यावरण शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार और टैक्सी ऑपरेटर की ओर से एनजीटी को एक प्रार्थना पत्र भी दिया जिसमें रोहतांग जाने वाले वाहनों की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया गया है।
नहीं जारी किया गया कोई नया आदेश
एसडीएम मनाली ज्योति गुप्ता ने बताया कि एनजीटी की ओर से रोहतांग के संदर्भ में कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया है। तीन जुलाई तक पहले की ही तरह एक हजार वाहन रोहतांग भेजे जाएंगे।
गौरतलब है कि गर्मियों की छुट्टियों में ट्राइसिटी के हजारों लोग रोहतांग घूमने जाते हैं। एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने वाली सेक्टर-41 की वीना शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस शनिवार को परिवार के साथ कुल्लु-मनाली घूमने का प्रोग्राम बनाया है। ग्रीन ट्रिब्यूनल के इस फैसले से उनके एंट्री टैक्स के रुपये तो बचेंगे।