सेलवेल मीडिया सर्विसेस को निगम को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। मामला पिछले 5 साल से विवाद में है। नगर निगम की ओर से दो वर्ष के लिए सेलवेल को ब्लैकलिस्ट करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम के फैसले पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है।
कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि उन्हें नगर निगम की ओर से 86 पब्लिक टायलेट का टेंडर अलॉट किया गया था, प्रति पब्लिक टायलेट का किराया नगर निगम की ओर से 23 हजार 142 रुपये तय किया गया। कंपनी ने टेंडर को चुनौती देते हुए कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी, जिसके बाद कोर्ट ने 17 नवंबर को नगर निगम को पार्टी बनाया है।
इसलिए नगर निगम ने उनकी कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। वीरवार को कंपनी के वकील ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि निगम केउन्हें ब्लैकलिस्ट करने के चलते वे अन्य टेंडर भी नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में याचिका लंबित रहते इन आदेशों पर रोक रहनी चाहिए। हाईकोर्ट ने कंपनी को तत्काल राहत से इनकार करते हुए 22 दिसंबर को सुनवाई निर्धारित की है।
पांच साल से विवाद
सेलवेल कंपनी को दिए गए पब्लिक टॉयलेट्स का मामला पिछले 5 साल से विवाद में हैं। नगर निगम के अनुसार एक तो कंपनी ने बार बार नोटिस जारी करने के बाद 10 करोड़ से ज्यादा का विज्ञापन शुल्क जमा नहीं करवाया है, दूसरा जो पब्लिक टायलेट कंपनी ने नगर निगम को वापस दिए हैं तो वह उस स्थिति में नहीं है, जिस स्थिति में कंपनी को चलाने के लिए अलाट किए गए थे।
नगर निगम के अनुसार साल 2006 से लेकर 2012 तक कं पनी को एक बार 84 और दूसरी बार 46 पब्लिक टॉयलेट चलाने के लिए दिए गए। हर टॉयलेट ब्लाक के बाहर विज्ञापन लगाने के लिए खाली जगह भी छोड़ी गई थी यह विज्ञापन शुल्क कंपनी को नगर निगम को जमा करवाना था, लेकिन कंपनी से ऐसा नहीं किया।