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मान कौर के अंतिम दर्शन को नहीं पहुंचा कोई अफसर

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चंडीगढ़। विश्व भर में मास्टर्स एथलेटिक्स में सिक्का जमाने वाली देश की वयोवृद्ध एथलीट के अंतिम संस्कार में न तो चंडीगढ़ प्रशासन का कोई नुमाइंदा पहुंचा और न ही पंजाब सरकार से। पंजाब और चंडीगढ़ से मान कौर का गहरा नाता था। चंडीगढ़ में रहते उन्होंने कई पदक अपने नाम किए। पंजाब के पटियाला में उनका जन्म हुआ था और पंजाबी यूनिवर्सिटी में अभ्यास करती थीं।
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सेक्टर-25 श्मशानघाट में अंतिम संस्कार में पहुंचे लोगों ने कहा कि जिस एथलीट ने शहर व देश का नाम ऊंचा किया, उसकी अंतिम विदाई के वक्त पर शहर के प्रशासनिक अफसरों को आना चाहिए था। मान कौर का निधन शनिवार को मोहाली के डेराबस्सी स्थित शुद्धि आयुर्वेदिक अस्पताल में हुआ था। वे गाल ब्लेडर के कैंसर से पीड़ित थीं। मान कौर की अस्थियाें का सोमवार को पंजाब के कीरतपुर साहिब में विसर्जन किया जाएगा।
अंतिम संस्कार के बाद मान कौर के बेटे गुरदेव सिंह ने कहा कि जो उनकी मां का मान सम्मान है, वह उन्हें मिलना चाहिए। बाकी सरकार की मर्जी है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी याद में पंजाब सरकार को कुछ करना चाहिए तो उनका कहना था कि उनकी मां ने देश-विदेश में मेडल जीतकर 135 करोड़ भारतीयों का मान बढ़ाया है, इस लिहाज से उनको सम्मान मिलना चाहिए था। संस्कार में प्रशासन और पंजाब सरकार के किसी भी प्रतिनिधि के नहीं आने पर उनका सिर्फ इतना कहना था कि सभी को आना चाहिए था। अंतिम संस्कार के वक्त शिरोमणि अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा व नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर व चंडीगढ़ शिअद प्रधान हरदीप सिंह ही पहुंचे।
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मान कौर से ट्रेनिंग लेकर नेशनल में जीते पदक
संस्कार के समय एथलीट विष्णुवीर भी पहुंचे। उन्होंने मान कौर से डाइट व एथलीट से जुड़े टिप्स सीखकर इंटर कॉलेज 5 हजार मीटर और 10 मीटर रेस के साथ 4 बार नेशनल में पदक बटोरे थे। मान कौर के बेटे गुरदेव सिंह ने बताया कि भविष्य में विष्णुवीर बेहतर प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करते हैं तो मैं समझूंगा कि मेरी मां ही पदक जीत रही हैं।
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