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हरियाणाः मुफ्त लैपटॉप के लिए नहीं 90 फीसदी से अधिक अंक की बाध्यता, निर्देश व हिदायतें जारी

Tue, 03 Dec 2019 11:28 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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हरियाणा में मेधावी विद्यार्थियों को मुफ्त लैपटॉप प्रदान करने के लिए 90 फीसदी से अधिक अंक की अनिवार्यता नहीं है। प्रदेश सरकार पांच श्रेणियों के पांच सौ छात्रों को लैपटॉप देगी। हर श्रेणी में सौ मेधावी छात्रों को सम्मानित किया जाएगा।
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दसवीं व बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले दोनों कक्षाओं के सौ टॉपर, सौ टॉप सामान्य श्रेणी की छात्राएं, सौ टॉप एससी छात्र, सौ टॉप एससी छात्राएं व सौ टॉप बीपीएल विद्यार्थियों को मुफ्त लैपटॉप मिलेंगे। निदेशक सेकेंडरी शिक्षा ने इस संबंध में सभी डीईओ को पत्र के जरिए निर्देश जारी कर दिए हैं।

साथ ही यह भी कहा है कि शिक्षा निदेशालय ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक वाले विद्यार्थियों को ही मुफ्त लैपटॉप देने की शर्त नहीं निर्धारित की है। मनमर्जी से कोई शर्त न लगाई जाए। निदेशालय ने यह निर्देश डीईओ कुरुक्षेत्र के मार्गदर्शन मांगने पर जारी किए हैं।
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उन्होंने निदेशालय को पत्र लिखकर स्पष्ट करने को कहा था कि क्या हरियाणा स्टेट मैरिट छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत केवल 90 फीसदी से अधिक अंक वाले छात्रों को ही मुफ्त लैपटॉप देने हैं। इस पर निदेशक सेकेंडरी शिक्षा ने सभी डीईओ को पत्र लिखा है।
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मार्च 2019 में पास बीपीएल के मेधावियों की सूची तैयार नहीं

सेकेंडरी शिक्षा निदेशक ने कहा है कि मार्च 2019 में पास मेधावी छात्रों को मुफ्त लैपटॉप प्रदान करने के लिए जरूरी कार्रवाई कर रहे हैं। अभी विद्यार्थियों की अंतिम सूची जारी नहीं हुई है। बीपीएल श्रेणी के मेधावियों की जो सूची स्कूल शिक्षा बोर्ड से प्राप्त हुई थी, उसे जिलों को भेजकर पुष्टि करने के निर्देश दिए थे, जिनकी पुष्टि अभी नहीं की गई है। इसलिए पांचों श्रेणियों की अंतिम सूची अभी तक जारी नहीं हो पाई। उन्होंने डीईओ को बीपीएल विद्यार्थियों की पुष्टि जल्दी करने को कहा है। चूंकि, लैपटॉप वितरण बीपीएल सूची की पुष्टि के बाद ही होगा।

अति आवश्यक मामले ही निदेशालय को भेजें
शिक्षा निदेशालय ने डीईओ को निर्देश जारी किए हैं कि वे स्कूल और विद्यार्थियों से जुड़ा अति आवश्यक मामला ही मुख्यालय को भेजें। कोई पत्र विद्यार्थियों की तरफ से आता है तो उसका भलिभांति अवलोकन करें। निदेशालय के ध्यान में आया है कि स्कूल में आने वाले पत्रों को बिना कोई टिप्पणी किए मूल रूप में ही भेज दिया जाता है जो उचित नहीं है।
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