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कैथल में नहीं कोई रैन बसेरा

Mon, 24 Nov 2014 11:53 PM IST
अमर उजाला, कैथ्ाल
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कोर्ट के आदेशों के बावजूद जिले में रैन बसेरा के नाम पर गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के लिए एक अदद छत मुहैया नहीं हो पाई है। जरूरत पड़ने पर लोग सड़कों पर बने फुटपाथ पर या फिर रेलवे स्टेशन पर खुले आसमान के नीचे रात बिताते हैं। जिला प्रशासन द्वारा रैन बसेरा बनाए जाने का निर्णय तो लिया जा चुका है। इसके लिए प्लानिंग भी तैयार हुई लेकिन प्रशासनिक कारणों से इस प्लानिंग को बदल दिया गया।
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अब अधिकारी इस बो में दोबारा से प्लानिंग किए जाने की बात कर रहे हैं। ऐसे में न जाने कब न्यायालय के आदेशों की पालना होगी और कब जरूरत पड़ने पर लोग रैन बसेरों में रात बिता सकेंगे। जिले में बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन ही प्रमुख सार्वजनिक स्थल हैं। जहां कई बार जरूरत पड़ने पर लोगों को रात बिताने के लिए छत की आवश्यकता महसूस होती है। लेकिन यहां दोनों ही सार्वजनिक स्थलों पर आने वाले लोगों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।

खुले आसमान के नीचे सोते हैं लोग
बस अड्डे में तो रात को 10 बजे ही दोनों प्रमुख द्वार बंद हो जाते हैं तथा किसी को अंदर नहीं आने दिया जाता। वहीं, रेलवे स्टेशन पर खुले आसमान में लोग रात बिताते हैं। अमर उजाला द्वारा की गई पड़ताल के दौरान पाया गया कि रात्रि दस बजे के बाद बस अड्डे के द्वार बंद हो जाते हैं। वहीं, रेलवे स्टेशन पर प्रतिक्षालय कक्ष के बाहर, प्लेटफार्म पर बनाई गई कुर्सियाें को ही लोग अपना बिस्तर बनाकर सोते हुए नजर आए। इसके अलावा बाहर पार्क के निकट बनाए गए फुटपाथ पर भी लोग खुले आसमान के नीचे एक चादर की ओट में अपने आप को सर्दी से बचाने का प्रयास करते हुए नजर आए। रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की प्रतिक्षा में बैंच पर सोए राजेंद्र कुमार का कहना था कि यदि प्रतिक्षालय खोल दिया जाए तो यात्री आराम से यहां आराम कर सकते हैं। लेकिन न जाने इसे बनाकर बंद क्यों किया गया है?
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प्रतिक्षालय पर लगा है स्थाई ताला
पूर्व में जहां जिले में केवल कुरुक्षेत्र-जींद तक रेल सेवा थी तथा देर रात्रि केवल एक ही ट्रेन आती थी। वहीं, अब रात्रि एक बजे जयपुर-चंडीगढ़ चलने वाली ट्रेन भी आती है। ऐसे में दूर से आने वाले वे लोग मुश्किल में रहते हैं, जिन्हें रेलवे स्टेशन पर ही बैठकर इंतजार करना होता है। क्योंकि यहां प्रतिक्षालय पर स्थाई ताला लगा हुआ है। रेलवे प्रशासन का मानना है कि यहां इतनी संख्या में यात्री नहीं आते कि प्रतिक्षालय खोला जाए। दूसरे प्रतिक्षालय खोले जाने पर लोग उसमें शराब पीते हैं तथा कई बार गंदगी फैलाते हैं।
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