पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि वाहन किसी कॉरपोरेशन को लीज पर देने से पहले बीमा कंपनी की अनुमति की जरूरत नहीं है। एक बार प्रीमियम का भुगतान होने पर वाहन को मालिक या उसकी अनुमति से कोई भी चला सकता है।
यह बीमा शर्त का उल्लंघन नहीं है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की रिकवरी के अधिकार को लेकर याचिका को खारिज कर दिया।
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की ओर से याचिका दाखिल कर कहा गया कि बलजिंदर सिंह ने अपने वाहन को लीज पर कॉरपोरेशन को दिया था।
वाहन ने एकदम से ब्रेक लगाया, जिसके चलते धर्मेंद्र सिंह की जो पीछे से आ रहा था बस से टकरा गया और उसकी मौत हो गई। इसके बाद मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल मोगा ने मौत की एवज में करीब 11 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने के बीमा कंपनी को आदेश दिया।
बीमा कंपनी ने कहा कि वाहन को लीज पर दिया गया था जो बीमा की शर्त का उल्लंघन है। इसके साथ ही वाहन का जो रूट परमिट है उस पर वह नहीं था और न ही वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट था।
हाईकोर्ट ने याची कंपनी की सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि यह बीमा कंपनी की जिम्मेदारी है कि वह साबित करे कि लापरवाही या बीमा की शर्त का उल्लंघन हुआ है। इस मामले में वाहन के पास भले ही उस रूट का परमिट न हो, लेकिन यह उस प्रकार के मामलों में नहीं है जहां रूट परमिट हो ही ना।
इसके अतिरिक्त भले ही वाहन को लीज पर दिया गया हो लेकिन कंपनी को प्रीमियम तो मिला ही है फिर इसको मालिक की मर्जी से चाहे जो चलाए। साथ ही कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि वाहन को लीज पर देने के लिए बीमा कंपनी की पूर्व मंजूरी अनिवार्य नहीं है।