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Chandigarh News: सुसाइड नोट में नहीं मिला कोई तात्कालिक कारण, रोहतक में दर्ज अवैध वसूली केस का भी जिक्र नहीं

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चंडीगढ़। हरियाणा के 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी एडीजीपी वाई पूरण कुमार के सुसाइड नोट में पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं लेकिन इसमें कोई तात्कालिक कारण या घटना का उल्लेख नहीं किया गया है। इसके अलावा रोहतक में उनके खिलाफ दर्ज अवैध वसूली से जुड़े केस का भी नोट में कोई जिक्र नहीं है।
चंडीगढ़ पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट की कानूनी जांच और परिवार के बयान के बाद ही की जाएगी। अभी पूरण कुमार की आईएएस पत्नी अमनीत पी कुमार ने पुलिस को कोई बयान नहीं दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पत्नी का बयान दर्ज होने के बाद केस दर्ज किया जाएगा। पूरण कुमार का बुधवार को पोस्टमार्टम नहीं हो सका। उनकी पत्नी ने मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की है। अब पुलिस वीरवार को डॉक्टरों के बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाएगी।
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सूत्रों के अनुसार पूरण कुमार ने अपने सुसाइड नोट में पूर्व डीजीपी समेत सात-आठ आईपीएस और दो आईएएस अधिकारियों के खिलाफ परेशान करने के आरोप लगाए हैं। साथ ही नोट में जातिवाद, पोस्टिंग में भेदभाव, एसीआर में गड़बड़ी, सरकारी आवास न मिलने और प्रशासनिक शिकायतों और लिटिगेशन का भी उल्लेख है।
पुलिस को यह भी पता चला है कि सुसाइड नोट में कोई तात्कालिक घटना या निजी झगड़े का जिक्र नहीं है यानी अधिकारी ने अपने अंतिम कदम के पीछे किसी अचानक हुए तनाव या हालिया विवाद को नहीं बताया। घटनास्थल से अधिकारी का सुसाइड नोट जेब में मिला था जबकि घर में उनका लैपटॉप नहीं मिला। एक लैपटॉप उनकी बेटी का बताया गया। पुलिस ने मौके पर सीएफएसएल और फॉरेंसिक टीम के साथ पूरी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की है। पुलिस अब सुसाइड नोट की लिखावट, तारीख और नोट में शामिल मामलों की विस्तृत जांच कर रही है।



पत्नी का फोन नहीं उठाया तो बेटी को बताया

अधिकारियों के अनुसार पूरण कुमार के बार-बार फोन न उठाने पर उनकी पत्नी को शक हुआ। उन्होंने जापान से अपनी बेटी को कॉल कर पिता के फोन न उठाने की जानकारी दी। इसके बाद उनकी बेटी बेसमेंट में गई, जहां उसने पिता को मृत अवस्था में पाया। गोली कनपटी से आरपार होकर दीवार में जा लगी थी।



अस्पताल की मोर्चरी पहुंची पत्नी

अमनीत पी कुमार जापान से लौटने के बाद पहले सेक्टर 24 स्थित सरकारी आवास पर पहुंचीं। शाम करीब चार बजे जीएमएसएच-16 के शवगृह पहुंचीं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सुसाइड नोट मृतक की पत्नी या अन्य आईपीएस अधिकारियों को पहले से भेजा गया था या नहीं। इसका पता मोबाइल अनलॉक होने के बाद ही चलेगा।


जिस लैपटॉप से नोट टाइप हुआ, नहीं मिला
जांच में यह भी सामने आया है कि सुसाइड नोट पहले से टाइप कर रखा गया था। पुलिस के मुताबिक, नोट तैयार करने में इस्तेमाल हुआ लैपटॉप अब तक बरामद नहीं हुआ है। वहीं, उनके दो मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए सीएफएसएल भेजे गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने आत्महत्या से पहले किनसे बात की थी।
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गनमैन सुशील कुमार को 6 अक्तूबर को गिरफ्तार किया गया था
इस बीच कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अधिकारी की मौत का दूर का संबंध रोहतक में दर्ज एक भ्रष्टाचार मामले से हो सकता है। इस केस में गनमैन सुशील कुमार को 6 अक्तूबर को गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप है कि उसने पूरन कुमार के नाम पर एक शराब ठेकेदार से 2.5 लाख रुपये की मांग की थी। हालांकि, चंडीगढ़ पुलिस ने कहा कि सुसाइड नोट में इस एफआईआर या आरोपी पुलिसकर्मी का कोई उल्लेख नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि पूरन कुमार को हाल ही में सुनारिया, रोहतक में नई पोस्टिंग दी गई थी लेकिन उन्होंने अभी कार्यभार संभाला नहीं था। उनके सहकर्मियों का कहना है कि कुछ दिन पहले एक समारोह में वे पूरी तरह सामान्य और प्रसन्नचित नजर आए थे।



जातिवाद को लेकर हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
वर्ष 2021 में पूरन कुमार ने तत्कालीन डीजीपी मनोज यादव के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जातिगत भेदभाव के आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी।
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