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दांतों की जांच में रेडिएशन का डर नहीं: सीएसआईओ ने बनाया देश का पहला रेडिएशन-फ्री डेंटल स्कैनर, बनेगा वरदान

Thu, 16 Oct 2025 10:57 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जहां सामान्य डेंटल एक्स-रे से मरीज को बार-बार विकिरण का सामना करना पड़ता है, वहीं स्कैन डी में मल्टी-स्पेक्ट्रल इल्यूमिनेशन और लाइट-इंड्यूस्ड फ्लोरेसेंस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इन तकनीकों की मदद से दांतों की सूक्ष्म संरचना की उच्च-रिजोल्यूशन छवियां प्राप्त होती हैं।
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डॉ अमित लादी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दांतों की जांच में अब रेडिएशन का डर नहीं होगा। केन्द्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ सीएसआईआर ) ने पीजीआई के सहयोग से और आईसीएमआर के समर्थन से एक खास तकनीक स्कैन डी विकसित की है, जो बिना किसी एक्स-रे किरणों के दांतों की समस्याओं का सटीक निदान कर सकेगा। इस तकनीक से अब दांतों की बीमारियों की पहचान बिना किसी विकिरण के हो सकेगी।
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सीएसआईओ के बायोमेडिकल इंस्ट्रुमेंटेशन ग्रुप के वैज्ञानिकों ने देश का पहला रेडिएशन-फ्री डेंटल स्कैनर तैयार किया है। इस परियोजना का नेतृत्व वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अमित लादी ने किया। उनका कहना है कि यह उपकरण भारत में मौखिक स्वास्थ्य सेवाओं में नई क्रांति लाएगा, खासकर वहां, जहां डेंटल जांच की सुविधा सीमित है। 

उन्होंने बताया कि जहां सामान्य डेंटल एक्स-रे से मरीज को बार-बार विकिरण का सामना करना पड़ता है, वहीं स्कैन डी में मल्टी-स्पेक्ट्रल इल्यूमिनेशन और लाइट-इंड्यूस्ड फ्लोरेसेंस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इन तकनीकों की मदद से दांतों की सूक्ष्म संरचना की उच्च-रिजोल्यूशन छवियां प्राप्त होती हैं। इससे डॉक्टर कैविटी, प्लाक, कैलकुलस, दरारें, और शुरुआती संक्रमणों को आसानी से पहचान सकते हैं, वो भी बिना किसी नुकसान के। यह तकनीक दांतों में शुरुआती स्तर पर समस्या पहचान कर महंगे और दर्दनाक इलाजों से बचाव का रास्ता खोलती है।

हर उम्र के मरीजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित

डॉ अमित ने बताया कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पूरी तरह रेडिएशन-फ्री है, जिससे यह गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से सुरक्षित है। डेंटल विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे देश में जहां लाखों लोग नियमित डेंटल जांच से डरते हैं, यह तकनीक मरीजों के डर को खत्म कर उनकी सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में यह उपकरण पारंपरिक एक्स-रे जितना ही सटीक और विश्वसनीय साबित हुआ है, लेकिन इसमें किसी भी हानिकारक किरण का इस्तेमाल नहीं होता।

डिजिटल इंटरफेस से आसान उपयोग

यह उपकरण पोर्टेबल है और इसमें ग्राफिकल यूजर इंटरफेस दिया गया है, जिससे दंत चिकित्सक दांतों की स्कैन की गई छवियों का तुरंत विश्लेषण कर सकते हैं।
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इसके जरिए मरीजों की रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित और साझा की जा सकती है। इससे ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में दंत जांच को सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में बड़ी मदद मिलेगी। डॉ. अमित लादी ने बताया कि हमारा उद्देश्य एक ऐसा समाधान तैयार करना था जो मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए जांच की सटीकता को बनाए रखे। अब भारत के ग्रामीण इलाकों में भी सुरक्षित, सस्ती और विश्वसनीय डेंटल जांच संभव होगी।
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