भाजपा ने बड़ी उम्मीदों के साथ पंजाबी गायिका मिस पूजा को पार्टी में शामिल किया था। पहले उन्हें होशियारपुर से चुनाव लड़ाने की बात चली। फिर खुलासा हुआ कि वह एससी कैटेगरी से नहीं हैं और होशियारपुर की आरक्षित सीट से चुनाव नहीं लड़ सकतीं।
फिर भाजपा नेताओं ने कहा कि मिस पूजा पार्टी के लिए प्रचार करेंगी, लेकिन अब तक वह प्रचार में नजर नहीं आई। स्थानीय पार्टी नेताओं को यह पता ही नहीं कि मिस पूजा कहां हैं।
जी भर गया हरभजन का सियासत से
नामी गायक और अदाकार हरभजन मान ने प्रत्येक चुनाव की तरह पिछले चुनाव में भी अपने ससुर बलवंत सिंह रामूवालिया के चुनाव की कमान संभाली थी। रामूवालिया शिअद में आ चुके थे, इसलिए मान ने शिअद के लिए भी पूरे पंजाब में प्रचार किया था। मई-2012 में सरकार ने उन्हें मोहाली के जिला योजना कमेटी चेयरमैन पद से नवाजा।
डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने खुद उनकी ताजपोशी की थी। कुछ दिन तो सब कुछ ठीक चला, उसके बाद सियासत से मान का जी भर गया। मीटिंग करना या योजना बनाना तो दूर, वह कभी जिला योजना कमेटी दफ्तर ही नहीं गए।
यह बात मीडिया की सुर्खियां बनीं। अदाकारी और सियासत के बीच कई महीने तक जद्दोजहद चली। आखिरकार मान ने इस्तीफा दे दिया और सियासत को अलविदा कह दिया। इस बार वह भी चुनाव प्रचार में अब तक नजर नहीं आए हैं।
शिअद से नाराज हैं हंसराज हंस
मशहूर सूफी गायक हंसराज हंस को पिछली बार शिअद ने लोकसभा चुनाव में जालंधर सीट से उतारा। हंस ने सियासी सुर साधने में भी बड़ी मेहनत की, लेकिन जीत नहीं सके। इस बार पार्टी ने पवन टीनू को जालंधर से टिकट दिया तो वह नाराज हो गए।
आखिर सुखबीर बादल उन्हें मनाकर बठिंडा में प्रचार करने को कहा, लेकिन हंस वहां भी अब तक एक्टिव नहीं हैं। चुनाव हो या क्रिकेट मैच, हर जगह लोगों को अपने जुमलों पर नचाने वाले नवजोत सिद्धू की कमी भी इस बार लोगों को खल रही है।
अमृतसर से टिकट काटे जाने से सिद्धू इतने नाराज हुए कि अमृतसर ही छोड़ दिया। अपने सियासी गुरु अरुण जेटली की मदद को भी नहीं पहुंचे। पूरे पंजाब में कहीं भी सिद्धू प्रचार के लिए नहीं आए हैं।