चंडीगढ़। सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि को सीबीआई अदालत से राहत नहीं मिली। अदालत ने 116 करोड़ रुपये से अधिक की कथित फर्जी एफडीआर और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) के 83 करोड़ रुपये के कथित फंड डायवर्जन से जुड़े दो मामलों में उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
सीबीआई के अनुसार, पहले मामले में चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और नगर निगम के बैंक खातों से जुड़ी एफडीआर जांच में संदिग्ध मिली थीं। आरोप है कि मार्च-अप्रैल 2025 में रिभव ऋषि ने बैंक सिस्टम में दर्ज किए बिना एफडीआर जारी कीं।
दूसरे मामले में क्रेस्ट के सरकारी फंड को कथित तौर पर शेल संस्थाओं तक पहुंचाने का आरोप है। सीबीआई ने ऋषि पर संदिग्ध डेबिट ट्रांजेक्शन को प्रोसेस और अधिकृत करने का आरोप लगाया है। बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए जमानत मांगी, लेकिन अदालत ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं।