हैरत की बात है कि हरियाणा के विभिन्न जिलों की स्थायी लोक अदालतों के लिए चयनित सदस्यों की अब तक नियुक्ति नहीं हो पाई है। इन सदस्यों की नियुक्ति पिछले छह माह से सरकारी अधिसूचना जारी न होने की वजह से लटकी हुई है। इसी वजह से ये सदस्य जिलों में स्थायी लोक अदालतों में अपनी सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं। इसके चलते इन अदालतों में लोगों की जन उपयोगिता, सुविधाओं और समस्याओं से जुड़े कई मामले भी वर्कलोड की वजह से लटके पड़े हैं।
एक साल का कार्यकाल, छह माह इंतजार में गुजरे
दरअसल, जिलों में न्यायिक व्यवस्था के अंतर्गत लगने वाली स्थायी लोक अदालतों में हरियाणा स्टेट लीगल सर्विस अथारिटी के तहत सदस्यों की नियुक्ति की जाती है। इन अदालतों में जन उपयोगिता, सुविधाओं और समस्याओं से जुड़े मामले आते हैं। जिनकी सुनवाई करते हुए ये सदस्य मामलों को समाधान एवं समझौतों तक पहुंचाते हैं। इन अदालतों में सदस्यों की नियुक्ति हालांकि 1 वर्ष के लिए की जाती है, लेकिन बाद में इस नियुक्ति को सदस्यों की बेहतर परफोरमेंस के आधार पर आगामी 5 सालों तक या सदस्य की उम्र 65 वर्ष होने तक आगे बढ़ाया जा सकता है।
दिसंबर 2017 में सदस्यों की चयन प्रक्रिया शुरू हुई थी। जनवरी 2018 के शुरुआती दिनों में हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश ने इस चयन प्रक्रिया को पूरा कर दिया था। बाद में चयनित सदस्यों के नाम हरियाणा सरकार को भेज दिए गए थे। हरियाणा सरकार की अधिसूचना के बाद इन सदस्यों को स्थायी लोक अदालतों में अपना कार्यभार संभालना था। लेकिन छह माह गुजरने के बावजूद आज तक इस संबंध में अधिसूचना ही जारी नहीं हुई पाई।
चेक करवाते हैं, क्या है माजरा
एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ जस्टिस डिपार्टमेंट हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव एसएस प्रसाद ने बताया कि इस मामले में वे जानकारी लेंगे और देखेंगे कि क्यों देरी हो रही है। उल्लेखनीय है कि स्थायी लोक अदालतों के लिए करनाल में अश्वनी कुमार जुनेजा व गोपाल कृष्ण, सोनीपत में डा. प्रदीप गौड़ व दीपा जैन, पानीपत में भगत राम, कैथल में पंकज कुमार गुप्ता, यमुनानगर में रविंद्र कुमार जैन, कुरुक्षेत्र में डा. प्रकाश व राजेश शर्मा, सिरसा में डा. कुलदीप सिंह, रेवाड़ी उषा यादव, गुरुग्राम में गरिमा जोशी, पंचकूला में आरएल मित्तल व अंबाला में डा. एसके तकयार का चयन किया गया है।