इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अगर आपकी तबीयत खराब हो गई तो मुश्किल है। यहां पर चिकित्सा व्यवस्था दुरुस्त होने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन यह व्यवस्था मानक के अनुरूप नहीं हैं। इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 939 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।
इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एंबुलेंस सहित अन्य चिकित्सा व्यवस्था पूरी की जानी चाहिए। चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लोक ल फ्लाइट पर रोजाना करीब तीन हजार लोग यात्रा करते हैं। लेकिन यहां पर मेडिकल व्यवस्था पूरी नहीं है। इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तीन एंबुलेंस होनी चाहिए लेकिन यहां पर एंबुलेंस सुविधा अभी तक नहीं है।
इस तरह की असुविधा केबाद लोगों को इमरजेंसी में समस्या हो सकती है। वहीं इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक्सरे मशीन और सिक्योरिटी चेक गेट मानक के अनुरूप नहीं हैं। वहीं इंटरनेशल एयरपोर्टपर कार्डियक अरेस्ट व चेस्ट पेन से निपटने केलिए ऑटोमेटिक एक्सटर्नल डीफाब्रलेटर (एइडी) यहां पर नहीं लगाए गए हैं।
जबकि मुंबई और दिल्ली में इसकी 100 मशीनें लगाई गई है। इस तरह की सुविधा नहीं होने से इमरजेंसी में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं विमानन कंपनियों की ओर से भी एंबुलेंस की व्यवस्था शुरू नहीं की गई है। शहर से छह विमानन कंपनियां अपनी फ्लाइट्स चलाती हैं। लेकिन किसी ने यह जहमत नहीं उठाई है।
इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चिकित्सा सुविधा को जल्द ही दुरुस्त किया जाएगा। विमानन कंपनियों को भी यह मानक पूरे करने होंगे।
सुनील दत्त, सीईओ, चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट