हरियाणा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। अंबाला से निर्मल सिंह और चित्रा सरवारा ने पार्टी को छोड़ दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष सुशील गुप्ता को भेजा है। इसमें निजी कारणों से पार्टी छोड़ने का हवाला दिया गया है। वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हैं कि दोनों एक बार फिर कांग्रेस पार्टी का दामन थाम सकते हैं। बता दें कि चित्रा सरवारा निर्मल सिंह की बेटी हैं। चर्चा है कि पांच जनवरी को वरिष्ठ कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के समक्ष दोनों कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। हालांकि अभी किसी ने आधिकारिक रूप से कोई खुलासा नहीं किया है।
2022 में ज्वाइन की थी आप
अप्रैल 2022 में निर्मल सिंह और उनकी बेटी चित्रा सरवारा ने आम आदमी पार्टी (AAP) ज्वाइन की थी। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने इनका पार्टी में आने पर स्वागत किया था। निर्मल सिंह ने अपनी हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट पार्टी (एचडीएफ) का विलय भी आप में कर दिया था। वहीं जगाधरी से आजाद चुनाव लड़ने वाले बेटे उदयवीर को भी निर्मल सिंह ने आप की सदस्यता दिलवाई थी। चित्रा सरवारा आप की प्रदेश उपाध्यक्ष रही हैं।
चार बार विधायक और दो बार मंत्री रहे निर्मल सिंह
चार नवंबर 2020 को निर्मल सिंह ने अपनी राजनीतिक पार्टी का गठन कर 43 साल बाद कांग्रेस को विधिवत रूप से अलविदा कह दिया था। निर्मल सिंह चार बार विधायक और दो बार पूर्व मंत्री रह चुके हैं। उत्तर हरियाणा के कई मुद्दों को लेकर निर्मल लंबे समय से संघर्षरत रहे हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी होने का बड़ा फायदा उन्हें तब मिला जब लोकसभा चुनाव 2019 में हुड्डा, उन्हें कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से टिकट दिलवाने में कामयाब रहे। मगर मोदी लहर के चलते निर्मल लोकसभा चुनाव हार गए थे।
वर्ष 2019 में बनाई थी नई पार्टी
वर्ष 2019 में निर्मल सिंह ने अपनी नई पार्टी हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट का गठन किया था। निर्मल सिंह के नेतृत्व में दो साल से भी कम समय में हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट ने उत्तरी हरियाणा के विभिन्न जिलों में अपनी राज्य, जिला, वार्ड और ग्राम इकाइयों का गठन किया था। हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट ने अंबाला शहर में 2020 में नगर निगम चुनाव लड़ा और दो पार्षद सीटों पर जीत दर्ज की थी।
इस वजह से छोड़ी थी कांग्रेस
निर्मल सिंह ने अंबाला कैंट सीट से गृह मंत्री अनिल विज के खिलाफ अपनी बेटी चित्रा सरवारा को चुनाव मैदान में उतारने की मांग कांग्रेस हाईकमान से की थी। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी चित्रा को टिकट दिलवाने की खूब कोशिश की। मगर अंबाला लोकसभा की सभी नौ विधानसभा सीटों के टिकट वितरण में कुमारी सैलजा की चली और चित्रा को टिकट नहीं मिला। इसी बात से नाराज होकर निर्मल सिंह अंबाला शहर और बेटी चित्रा को अंबाला कैंट सीट पर आजाद उम्मीदवार के रूप में उतारा था। पिता-पुत्री की इस बगावत का नतीजा यह रहा कि दोनों ही सीटों पर कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा था।