नगर निकाय चुनाव में शिअद-भाजपा गठबंधन को मिली सफलता ने इसके नेताओं के हौसले तो बढ़ाए ही हैं, 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी जमीन भी तैयार कर दी है। इस चुनाव में जहां गठबंधन मजबूती से उभरा है, वहीं बिखरे विपक्ष के लिए यह समय आत्म चिंतन का है।
गठबंधन की इस भारी सफलता के बीच पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का कांग्रेस वोट बैंक सरकने संबंधी बयान भी यह संकेत दे रहा है कि हालात किस राह पर चल निकले हैं। सीधे तौर पर देखें तो नगर निकाय चुनाव में पंजाब की जनता ने कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियों को पूरी तरह से नकार कर या तो शिअद-भाजपा गठबंधन को फतवा दिया है या फिर तीसरे विकल्प के रूप में निर्दलीय प्रत्याशियों का साथ दिया है। इसने प्रदेश में तीसरे विकल्प के प्रति लोगों की रुचि का संकेत भी दिया है।
बहरहाल शिअद-भाजपा गठबंधन को नगर निगम, नगर परिषद व नगर पंचायत चुनाव में बड़ी सफलता मिली है। छह में से पांच नगर निगमों और 122 में से 72 नगर परिषदों, पंचायतों में गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला है। कांग्रेस को केवल चार नगर परिषदों में पूर्ण बहुमत हासिल हुआ है। इस प्रकार मौजूदा हालात में गठबंधन का परचम पंजाब में फहरा रहा है और यह सिलसिला वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव से बदस्तूर जारी है। 2014 के लोकसभा चुनाव में जरूर आम आदमी पार्टी को मिले समर्थन से गठबंधन कुछ डांवाडोल होता दिखाई पड़ा था, लेकिन उसके बाद प्रदेश में हुए हर चुनाव व उप चुनाव में में इसके प्रत्याशियों को बड़ी सफलता मिली है।
इससे अकाली-भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के हौसले बुलंद होना स्वाभाविक है जबकि विपक्षी नेताओं के लिए यह चिंता का समय है। इस सबके बीच कैप्टन अमरिंदर का यह कहना कि शिअद-भाजपा विरोधी वोटों का कांग्रेस की बजाय निर्दलीयों के पक्ष में जाना चिंताजनक है, ने पार्टी के अंदरूनी मनमुटाव को एक बार फिर जगजाहिर कर दिया है। इस सबके बीच मौजूदा हालात गठबंधन के पक्ष में दिखाई पड़ रहे हैं तथा किसी मजबूत विपक्ष की गैर मौजूदगी इसे और मजबूती प्रदान कर रही है।
...जीत जाएंगे हम, तू अगर संग है..
...जीत जाएंगे हम, अगर संग है...। नगर निकाय चुनाव में गठबंधन की इस जीत पर हिंदी गाने की यह पंक्तियां पूरी तरह से फिट बैठती हैं। लोकसभा चुनाव के बाद से अकाली-भाजपा के अलग-अलग होने से संबंधित चर्चाओं के बीच दोनों का यह चुनाव मिलकर जीतना गठबंधन की सेहत के लिए भी अच्छा प्रतीत हो रहा है। इसने संकेत दिया है कि दोनों दल संग-संग चलकर ही पंजाब ही चुनावी जंग जीत सकते हैं।