आस्तिक बन, ना नास्तिक बन, बनना है तो वास्तिवक बन...उर्दू की रुमानियत और मुल्क से इश्क पर न्योछावर ऐसे न जाने कितने नगीने शनिवार शाम चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में बिखरे, जिन्हें सुनने वालों ने बड़े प्यार से सहेज लिया।
मौका था जश्ने हरियाणा के तहत जुटने वाला कुलहिंद मुशायरा- जो एक बार फिर चंडीगढ़ के नफीस बाशिंदों को अदब का रंग बिरंगा गुलदस्ता थमा गया। स्टार शायर निदा फाजली महफिल की शान बने जिन्हें सुनने के लिए लोग देर रात तक बैठे रहे। फाजली ने अपनी शायरी से श्रोताओं का दिल जीत लिया।
इस दौरान उनकी खास तौर पर पढ़ी गई इस नज्म ने तो खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने ये नज्म अपने पिता को समर्पित की थी। निदा की फिलॉसफी से लबरेज संजीदा शायरी ही नहीं थी जो दर्शकों के हिस्से आई। कॉमेडी, तंज, नज्म ग़ज़ल और दिलचस्प वाकये भी थे जो बेसाख्त़ा झोली में गिरते गए।
फरीदाबाद से तशरीफ लाए यूसुफ भारद्वाज ने ग़ज़ब के फक्कड़ अंदाज में टैगौर थिएटर को ठहाकों से सराबोर करा दिया। उन्होंने हरियाणा वालों की मस्ती और सादगी की शान में दर्जनों लतीफों की गुगली फेंकी जिन्हें बल्ले पर लेते-लेते दर्शकों के पेट में बल पड़ गए।
मुशायरे में मुहब्बत और इश्क का अगर दरिया बहा तो सियासत पर तंज भरे सोते भी उमड़े। निदा ने अपने कलाम से सबका दिल जीता ही, लेकिन साथ ही गोरखपुर के कलीम कैसर, टौंक से डा. जया टौंकी, भोपाल से विजय तिवारी, पुणे से असलम चिश्ती, मुरादाबाद से कशिश वारसी समेत करीब बीस शायरों ने शाम को यादगार बना दिया।