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नवजोत सिद्धू की मुश्किलें: कांटों भरा ताज है पंजाब कांग्रेस की प्रधानगी, हर कदम पर गुरु को झेलनी पड़ेगी बाउंसर

Mon, 19 Jul 2021 08:53 AM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

पंजाब में 2022 का चुनाव कांग्रेस नवजोत सिद्धू के नेतृत्व में लड़ेगी। सत्ता विरोधी लहर को कुंद करना और 2017 में किए गए चुनावी वादों को पूरा करवाना सिद्धू के लिए आसान नहीं होगा। महज आठ माह का समय चुनाव में रह गया है और इस दौरान बेअदबी, नशा, रेता बजरी, ट्रांसपोर्ट माफिया पर नकेल कसने के लिए सिद्धू को कैप्टन सरकार पर प्रेशर बनाना ही पड़ेगा।  
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प्रधान पद मिलने के बाद नवजोत सिद्धू ने पटियाला में गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब में माथा टेका। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के लिए पंजाब कांग्रेस की प्रधानगी कांटों भरे ताज के साथ साथ चुनौतीपूर्ण होगी। महज आठ माह बाद चुनाव है। सिद्धू के सामने इन चुनाव में पार्टी को सत्ता में लाना जहां चुनौती होगी, वहीं टीम कैप्टन से भी हर मोड़ पर सामना करना पड़ेगा। इतना ही नहीं प्रदेश कांग्रेस में तमाम गुटों में संतुलन बनाना भी एक बड़ी चुनौती होगी।

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सिद्धू को अभी संगठन का बिलकुल तजुर्बा नहीं है। बेशक वह सांसद विधायक व मंत्री बन चुके हैं लेकिन संगठन में काम करना उनके लिए नया है। पंजाब में जहां कैप्टन अमरिंदर सिंह की अफसरशाही पर मजबूत पकड़ है, वहीं सूबे में प्रताप बाजवा व शमशेर सिंह दूलो के गुट से भी उनको तालमेल बनाना होगा। बाजवा अभी कैप्टन के निकट चल रहे हैं, इसलिए सिद्धू को आगे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। शहीद बेअंत सिंह के परिवार जिसमें सांसद रवनीत सिंह बिट्टू व विधायक गुरकीरत कोटली हैं, वह सिद्धू के खिलाफ मुखर हैं। उनको भी साथ लाना एक चुनौती है। 


राणा गुरजीत सिंह का अलग गुट है, जिसमें विधायक सुशील रिंकू, लाडी शेरोवालिया, रमनजीत सिंह सिक्की भी हैं, उनको भी साथ लाना आसान नहीं होगा। किसी समय में सुशील रिंकू ही सिद्धू के विरोध में उतर चुके हैं। वहीं संगठन में सुनील जाखड़ लंबे समय तक रहे हैं, उनकी पकड़ जमीनी स्तर पर है और उनका अपना एक अलग गुट है। जाखड़ के गुट से तालमेल बनाकर संगठन तैयार करना सिद्धू के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
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पार्टी सिद्धू के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और सत्ता विरोधी लहर को कुंद करना और 2017 में किए गए चुनावी वादों को पूरा करवाना भी सिद्धू के लिए आसान नहीं होगा। महज आठ माह का समय चुनाव में रह गया है और इस दौरान बेअदबी, नशा, रेता बजरी, ट्रांसपोर्ट माफिया पर नकेल कसने के लिए सिद्धू को कैप्टन सरकार पर प्रेशर बनाना ही पड़ेगा। कुल मिलाकर आने वाला समय सिद्धू के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होगा और सिद्धू को हाईकमान की कसौटी पर खरा उतरना ही होगा।

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