नई यूनिट्स, महंगे उपकरण…फिर भी सिर्फ 141 करोड़ की बढ़ोतरी
प्रो. जगत राम ने कहा- सप्लीमेंट बजट से ही जगेगी उम्मीद, पीजीआई को नई जिम्मेदारियों के मुकाबले बजट बढ़ोतरी नाकाफी
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पीजीआई में मदर एंड चाइल्ड न्यूरोसाइंस सेंटर की शुरुआत, अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय चिकित्सा उपकरणों की स्थापना और ऊना व संगरूर में बने सैटेलाइट सेंटरों के पूर्ण संचालन जैसी बड़ी जिम्मेदारियों के बीच वर्ष 2026-27 के लिए घोषित बजट को अपर्याप्त बताया जा रहा है। पीजीआई के पूर्व निदेशक प्रो. जगत राम का कहना है कि बजट में दिखाई गई बढ़ोतरी संस्थान की वास्तविक जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है और इससे नई योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े होते हैं।
प्रो. जगत राम के अनुसार वर्ष 2025-26 में पीजीआई का कुल बजट 2417.86 करोड़ रुपये था, जिसे 2026-27 में बढ़ाकर 2559.65 करोड़ रुपये किया गया है। इस तरह कुल बढ़ोतरी महज 141.79 करोड़ रुपये की हुई है। उन्होंने कहा कि जब संस्थान में दो बड़े हाई-एंड सेंटर शुरू हो रहे हैं और महंगे न्यूरोसाइंस व मातृ-शिशु देखभाल उपकरण लगाए जा रहे हैं तो यह बढ़ोतरी नाकाफी है।
उन्होंने बजट के मदवार आंकड़ों पर भी चिंता जताई। ग्रांट-इन-एड (सैलरी) 1450.86 करोड़ रुपये से घटकर 1450 करोड़ रुपये रह गया है, यानी इसमें 0.86 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। वहीं जनरल ग्रांट-इन-एड में केवल 23 करोड़ रुपये की मामूली बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा चिंता कैपिटल एसेट्स को लेकर है जहां निर्माण कार्य और मशीनरी के लिए बजट 430 करोड़ रुपये से घटाकर 390 करोड़ रुपये कर दिया गया है, यानी सीधे 40 करोड़ रुपये की कटौती।
प्रो. जगत राम ने कहा कि नए सेंटरों की स्थापना, अत्याधुनिक मशीनों की खरीद, उनके रखरखाव और सैटेलाइट सेंटरों को पूरी क्षमता से संचालित करने के लिए कम से कम 250 से 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था जरूरी थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार या पीजीआई प्रशासन सप्लीमेंट्री बजट के जरिये इस कमी को पूरा करेगा ताकि पीजीआई की योजनाएं कागजों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हो सकें।