विरासत में मिली थी 30 किला जमीन
दरअसल, पंजाब में अकाली दल की सरकार के दौरान ही वाहिद का उदय हुआ है। 1970 में उनके पास पुश्तैनी जमीन 30 किला थे, जो पिता और दादा से विरासत में मिली थी। इसके बाद उन्होंने इस जमीन को बेचा और 40 किला जमीन खरीद ली। जरनैल वाहिद के नजदीकी बताते हैं कि किसी समय वह कचहरी में स्कूटर पर आते थे। देखते ही देखते बुलंदियों को छूने लगे।
नवांशहर के गांव बीनेवाला में वाहिद परिवार के पास 200 एकड़ जमीन है। किसान पैसे के लिए धरने लगाते रहे, लेकिन वाहिद ने उनका बकाया नहीं दिया, उल्टा होशियारपुर के गांव खनौड़ा में करीब 80 किले जमीन खरीद ली। पंजाब के फगवाड़ा में कई बार गन्ना किसानों ने चक्का जाम किया कि उनका बकाया शुगर मिल अदा नहीं कर रही। लेकिन उन्हें राहत देने के बजाय हिमाचल में 2016-2017 में एक क्रशर वाहिद व हिस्सेदार ने मिलकर खरीदा।