चंडीगढ़ में ओला, उबर और इन-ड्राइवर जैसी एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी पर आखिरकार यूटी प्रशासन सख्त हो गया है। नए रेट लागू न करने और शहर में वर्किंग कार्यालय न होने पर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने इन कंपनियों को नोटिस जारी करते हुए 15 दिन का समय दिया है। अगर तय समय में नियम नहीं माने तो उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
सात जुलाई को प्रशासन ने चंडीगढ़ मोटर व्हीकल एग्रीगेटर पॉलिसी-2025 के तहत कैब-टैक्सी और ऑटो के किराए में संशोधन को मंजूरी दी थी। पहली बार पहले तीन किमी तक फ्लैट रेट तय किए गए। न्यूनतम किराया 90 रुपये रखा गया जबकि कैब चालकों की मांग 100 रुपये थी। इसके अलावा आदेश था कि ड्राइवर को 90 फीसदी राइड का किराया मिलना चाहिए लेकिन कंपनियों ने यह रेट और नियम लागू ही नहीं किए। उल्टा उन्होंने कमीशन मॉडल खत्म कर सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू कर दिया, जिससे ड्राइवरों का शोषण और बढ़ गया। जीएसटी का बोझ भी अब ड्राइवरों पर डाल दिया गया है।
इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को चंडीगढ़ ट्राइसिटी कैब ड्राइवर यूनियन के अध्यक्ष अमनदीप सिंह, उपाध्यक्ष सुरिंदर सिंह खालसा और सचिव राजिंदर कुमार भट्टी ने पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात की और इस समस्या के बारे में बताया। अमनदीप सिंह ने प्रशासक को बताया कि एग्रीगेटर कंपनियां रोजाना करोड़ों की कमाई कर रही हैं लेकिन प्रशासनिक आदेशों को दरकिनार कर रही हैं और ड्राइवरों का शोषण कर रही हैं। उन्होंने अन्य समस्याओं की भी प्रशासक को जानकारी दी।
एसटीए ने दिया 15 दिन का समय
इस पर प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने परिवहन सचिव से उसी समय जवाब मांगा। संतोषजनक जवाब नहीं दे पाने पर प्रशासक ने उन्हें तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी में भी हलचल मची और अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए। एसटीए के अधिकारी इन कंपनियों की तरफ से बताए गए एड्रेस पर पहुंची तो वहां पर कोई वर्किंग दफ्तर ही नहीं मिला। इसके बाद अब इन कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड करने के नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है अगर इस 15 दिन में वह प्रशासन के नियमों को मान लेते हैं तो उनका लाइसेंस बहाल कर दिया जाएगा अन्यथा तीन सस्पेंड के नोटिस के बाद लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
प्रशासन को शक, सिर्फ लाइसेंस पाने के लिए दिखावी दफ्तर
एग्रीगेटर कंपनियों को स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने चंडीगढ़ में कैब-टैक्सी सेवा देने के लिए लाइसेंस जारी किया है। लाइसेंस इसी शर्त पर दिया गया था कि कंपनियों का वर्किंग दफ्तर चंडीगढ़ में होना चाहिए। लाइसेंस पाने के लिए कंपनियों ने दफ्तर भी खोला लेकिन जब एसटीए ने नए रेट लागू नहीं करने पर इनके सेक्टर-17, 32 व अन्य जगहों पर दस्तावेजों में दिखाए गए दफ्तर से संपर्क करने की कोशिश की गई तो पता चला कि इनके वर्किंग ही नहीं है। एक कंपनी का दफ्तर तो छह महीने पहले ही बंद हो चुका है। इससे प्रशासन को यह अंदेशा है कि कंपनियों ने सिर्फ लाइसेंस पाने के लिए चंडीगढ़ में दफ्तर खोला और लाइसेंस मिलने के बाद जा चुके हैं।
लाइसेंस रद्द हुआ तो खड़ी होगी बहुत बड़ी समस्या
अगर लाइसेंस रद्द हो गया तो चंडीगढ़ में कोई भी ओला, उबर और इन-ड्राइवर जैसी एग्रीगेटर कंपनी अपनी कैब टैक्सी नहीं चला पाएंगे। अगर चलते हुए पाए गए तो उनका मोटा चालान होगा। चंडीगढ़ में करीब 20 से 25 हजार टैक्सियां है, जिसमें करीब 1 लाख लोग रोजाना सफर करते हैं। इसमें बहुत सारी यात्राएं सिर्फ चंडीगढ़ नहीं बल्कि ट्राइसिटी स्तर पर होती है। ऐसे में अगर इन गाड़ियों का लाइसेंस सस्पेंड हुआ तो बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।