यूटी के विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार और कामचोरी रोकने के लिए इंटर डिपार्टमेंट ट्रांसफर पॉलिसी बनाई है। इसके तहत वर्षों से एक ही डिपार्टमेंट में जमे अधिकारियों और कर्मियों को दूसरे डिपार्टमेंट में भी ट्रांसफर किया जा सकेगा। यूटी में पहली बार इस तरह की पॉलिसी बनाई गई है। इसे लागू करने के लिए प्रशासक के एडवाइजर विजय कुमार देव की ओर से सभी सेक्रेटरी और विभागों को ऑर्डर भी जारी कर दिया गया है।
अभी तक जो अधिकारी या कर्मी जिस मूल विभाग में भर्ती होते थे, वहीं से उनकी रिटायरमेंट हो जाती थी, लेकिन अब ग्रुप ए, बी, सी और डी के अधिकारियों व कर्मचारियों का नई पॉलिसी के तहत किसी भी विभाग में ट्रांसफर किया जा सकेगा। हालांकि, निगम, बोर्ड और कॉर्पोरेशन में यह पॉलिसी लागू नहीं होगी। इससे पहले हाल में ही विजय देव ने वर्षों से जमे कई अधिकारियों को रिपैट्रिएट किया था।
यह तो आपकी शिकायतों का असर हैः
विभिन्न विभागों में काम नहीं होने और भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें आने के बाद ही एडवाइजर ने यह कदम उठाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पॉलिसी से जहां भ्रष्टाचार और कामचोरी पर लगाम लगाई जा सकेगी, वहीं यूनियनबाजी भी रोकी जा सकेगी।
बिना नोटिस दिए होगी मूल विभाग में वापसी
ग्रुप ए, बी के अधिकारियों और कर्मचारियों के इंटर डिपार्टमेंट ट्रांसफर के लिए सेक्रेटरी पर्सोनल कंपीटेंट अथॉरिटी होंगे, जबकि ग्रुप सी और डी की ट्रांसफर अथॉरिटी स्पेशल सेक्रेटरी पर्सोनल के पास होगी। मूल विभाग में जो जिस पोस्ट पर होगा, उसी पोस्ट पर दूसरे विभाग में ट्रांसफर किया जाएगा और सैलरी भी मूल विभाग से ही मिलेगी। इसके अलावा अधिकारी या कर्मचारी को बिना कारण बताए या नोटिस दिए कभी भी मूल विभाग में वापस भेजा जा सकेगा।
पकड़े जा चुके हैं कई एजेंट
रजिस्ट्रिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी में अधिकारियों और बाबुओं के साथ दलालों की साठगांठ उजागर होती रही है। कई एजेंट मौके पर पकड़े भी जा चुके हैं। सोशल वेलफेयर, डीसी ऑफिस, एस्टेट ऑफिस और फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट पर भी कई बार सवाल उठे हैं। अब नई पॉलिसी से इस पर लगाम लग सकती है।