श्री गुरु ग्रंथ साहिब के लापता पावन स्वरूपों के मामले में अलग-अलग पंथक संगठनों द्वारा एसजीपीसी के मुख्यालय तेजा सिंह समुद्री हाल के बाहर पक्का मोर्चा लगाने की शुरुआत शिअद (बादल) के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। आगामी विधान सभा और एसजीपीसी चुनाव में शिअद को इससे कई राजनितिक व धार्मिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
सिखों के साथ जुड़े इस संवेदनशील धार्मिक मामले में बादल परिवार से बागी होकर शिअद (डी) का गठन करने वाले सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने पंथक संगठनों के इस कदम का समर्थन किया है। ढींढसा इस मुद्दे को आगामी एसजीपीसी चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनाने की कवायद में जुट गए हैं। वहीं बादल परिवार से बागी होकर दिल्ली में जागो पार्टी का गठन करने वाले दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके भी इस मामले में एसजीपीसी के वर्तमान निजाम के साथ-साथ बादल परिवार पर निशाने साध रहे हैं।
जीके बादल परिवार को दिल्ली की सिख राजनीति से अलग-थलग करने के लिए लापता पावन स्वरूपों के मामले को दिल्ली की संगत के सामने उठा रहे हैं। लापता स्वरूपों के मामले में शिअद (ब) उसी तरह पंथक कटघरे में खड़ा है, जैसे 2015 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी व बहिबलकलां में गोलीबारी से दो सिख नौजवान के शहीद होने के मामले में था। इस घटना के बाद शिअद (ब) से पंथक वोट खिसक गया है, जिसके नतीजे में सुखबीर को 2017 विधानसभा चुनाव में कड़ी पराजय झेलनी पड़ी थी।