रेलवे के अनुसार नैरोगेज इंजन पर चलने वाले इंजन की आयु 36 साल मानी गई है। पठानकोट-जोगिन्द्रनगर के बीच नैरोगेज रेल ट्रैक पर चल रहे 17 इंजनों में से अधिकांश अपनी आयु पूरी कर चुके हैं। 1976 में इस ट्रैक को 5 इंजन मिले थे जो अब 44 साल पुराने हो चुके हैं। साल 1977 में ट्रैक को 5 इंजन मिले थे जो इस समय 43 साल के हो चुके हैं।
साल 1981 में इस रूट को 5 अन्य इंजन मिले थे जिनकी आयु 39 साल की है। साल 1982 में इस रूट को 2 इंजन मिले थे जो 38 साल पुराने हो चुके हैं। यह इंजन औसतन 34 साल चलने थे जबकि इनमें से 15 को आयु पूरी होने के बाद भी लगातार चलाया जाता रहा।
पठानकोट रेलवे लोको अधिकारी ने बताया कि परेल वर्कशॉप से दूसरा नया इंजन पठानकोट लोको पहुंच गया है। परेल वर्कशॉप इंजीनियरिंग ब्रांच को इसका ट्रायल लेने के लिए लिख दिया गया है। मार्च के पहले सप्ताह में टीम के पठानकोट आने की उम्मीद है। टीम के नेतृत्व में ट्रायल लिया जाएगा। इसके बाद इंजन को नैरोगेज ट्रेनों के साथ जोड़कर हिमाचल प्रदेश भेजा जाएगा।