अब अगर कोई यात्री टिकट बुकिंग के समय आयु अधिक बताकर वरिष्ठ नागरिक कोटे का लाभ उठाता पकड़ा गया तो उसे बेटिकट माना जाएगा।
रेलवे के नए नियम के मुताबिक उस पर जुर्माना भी होगा। अक्सर लोअर सीट पाने के चक्कर में लोग लोअर बर्थ कोटा का अनुचित लाभ उठा लेते हैं। इसकी वजह से वरिष्ठ नागरिकों को कोटे का लाभ सही तरीके से नहीं मिल पाता है।
इस कोटे का अनुचित लाभ उठाने वाले टिकट दलालों पर लगाम लगाने के लिए सीआरआईएस और आईआरसीटीसी की ओर से नया प्रावधान किया जा रहा है, ताकि इस सुविधा का लाभ सही तरीके से बुजुर्गों को मिल सके।
अब दलालों की टिकट काउंटर पर नहीं गलेगी दाल
एक फरवरी से रेलवे टिकट काउंटर पर दलालों की दाल नहीं गलेगी। क्योंकि अब बुक होने वाले टिकट पर पीएनआर नंबर, टिकट की राशि के साथ-साथ वह कोटा या सुविधा भी अंकित की जाएगी, जिसके तहत टिकट बुक की गई है। इससे टिकट चेक करने वालों को यात्री की टिकट जांच करने में आसानी होगी और अनुचित ढंग से रेल विभाग को लग रही चपत पर भी अंकुश लगेगा।
अभी ऐसे होता था वरिष्ठ नागरिक कोटे का दुरुपयोग
दलाल गलत आयु बताकर सेटिंग से वरिष्ठ नागरिक कोटे में टिकट बुक करा लेते थे। क्योंकि टिकट लेते समय काउंटर पर आयु प्रमाण पत्र नहीं देना पड़ता है। जानकारी के अनुसार सफर के दौरान पकड़े जाने पर सिर्फ यात्रियों को कोटे में मिले छूट का किराया ही भरना पड़ता था। अगर टिकट चेकिंग नहीं हुई तो रेलवे का नुकसान होता था।
जब बुजुर्ग टिकट लेने टिकट खिड़की तक जाते थे, तब तक दलाल अपने मंसूबों को अंजाम दे चुके होते हैं और ट्रेनों में सीटें फुल हो जाती हैं। विभाग की ओर से 60 वर्ष के पुरुषों और 58 वर्ष की महिलाओं को वरिष्ठ नागरिकों की कैटेगरी में माना जाता है।
एक फरवरी से लागू की जा रही इस नई नीति के बारे में मंडल के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, टिकट निरीक्षकों, टिकट चेकिंग स्टाफ को अवगत करवा दिया गया है। रेल विभाग का इस नीति को लागू करने का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सुविधा पहुंचाना है।
नीरज शर्मा, सीपीआरओ रेलवे, नई दिल्ली।