अब वह समय चला गया, जब पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित फिक्शनल किताबें और पश्चिम के लेखक ही किताबें लिखा करते थे। अब समय बदल चुका है। युवा भारतीय लेखकों ने लेखन की एक नई दुनिया बसा ली है। यह युवा न सिर्फ जबरदस्त लेखन कर रहे हैं बल्कि उनकी लिखी किताबें युवाओं के बीच नई सोच पैदा कर रही है। इन युवाओं ने लेखन की दुनिया में अपना नाम बना लिया है।
इन युवा लेखकों की बचपन की यादों से प्रेरित स्टोरी वास्तव में दिल को छू जाने वाली बन रही है और पश्चिमी फिक्शन से ज्यादा आगे निकल रही हैं। अमर उजाला ऐसे ही उन युवा लेखकों से मिला जिन्होंने अपनी स्टडी के साथ ही लेखन की शुरुआत कर डाली थी। इसमें जो बात सामने आई वह यह कि युवा लेखक किसी प्रकार का प्रयोग करने से नहीं डरते हैं और अपनी पर्सनल स्टोरी को पाठकों तक पहुंचाने में कोई गुरेज नहीं करते। जस्ट फ्रेंड्स और ए लाट लाइक लव ए लिटिल लाइक चाकलेट जैसी किताबों ने वास्तव में युवाओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।
टिशा की तो बात ही निराली है
युवा लेखकों की बात करें तो टिशा खोसला का नाम सबसे पहले आता है। टिशा ने युवाओं पर केंद्रित किताब पिंक एंड ब्लैक लिखी और उसके बाद उन्होंने इसी किताब की सीरीज के रूप में पिंक एंड ब्लैक का दूसरा पार्ट लिखा। टिशा खोसला ने यूके से मास्टर्स किया और उनका पैशन हमेशा पढ़ने और लिखने से संबंधित रहा। टिशा की पिंक और ब्लैक गोल्डन क्विल बुक अवार्ड से नवाजी जा चुकी है। इस किताब को युवाओं ने काफी पसंद किया। उनकी लेखन की शैली एकदम जुदा है।
केशव की कहानी एकदम जुदा
केशव अनिल भी एक युवा लेखक हैं। उन्होंने अब तक तीन किताबें प्रॉमिस मी ए मिलियन टाइम्स, द वन फ्राम द स्टार्स और अवर स्टोरी आफ लव लिखी हैं। इन तीनों ही किताबों ने हजारों पाठकों का दिल जीता। उनकी तीसरी किताब काफी खास है। इसमें पार्थ नाम के लड़के की कहानी है, जो जीवन व्यापन के लिए अपने पिता की टैक्सी चलाता है।
सिर्फ 18 वर्ष की आयु में ही अपने घर की सारी जिम्मेदारी उठाता है। इसके लिए उसने अपने लेखक बनने के सपने को दबाया है, पर वो यह जानता है की आज नहीं तो कल उसे मौका और सफलता जरूर मिलेगी। केशव अनिल ने बताया कि वास्तव में लेखन की कला के लिए उन्होंने अपना जॉब भी छोड़ दिया था।
उनकी कोशिश होती है कि ज्यादा से ज्यादा कंटेंट आम आदमी से जुड़ा हुआ हो और वह इसके लिए पूरी रिसर्च करते हैं। अनिल को लिखने के साथ ही पढ़ने का काफी शौक है। अनिल के पिता एक बैंकर हैं।
दिल जीत लेती हैं ट्वेशा की कविताएं
ट्वेशा दीक्षित की बात एकदम हटकर है। ट्वेशा न सिर्फ लेखन के साथ जुड़ी हैं बल्कि उनकी पहली पसंद ट्रेवलिंग है। वह न सिर्फ लेखन के साथ जुड़ी हैं बल्कि उनकी पहली पसंद ट्रेवलिंग है। उनकी किताब में कुछ ऐसा ही टच भी मिलता है। ट्वेशा ने बताया कि उन्होंने पहले एक साल अपना ब्लॉग लिखा और उसके बाद उन्होंने उसी ब्लॉग को किताब में कनवर्ट कर दिया।
ट्वेशा ने कहा कि इस कविताओं की किताब में एकदम अलग सी फीलिंग है। थोड़ी समाज से जुड़ी हुई बातों को भी उठाया गया है। ट्वेशा फिलहाल बैचलर्स डिग्री सदर्न फिल्म और मीडिया स्टडी कैलिफोर्निया की यूनिवर्सिटी से कर रही हैं। ट्वेशा ने बताया कि लिखना उनका पैशन है और वह हर रोज कुछ न कुछ रचनात्मक लेखन करती हैं।
युवा लेखकों का साहित्य में दखल वास्तव में होना आवश्यक है। इनमें नई ऊर्जा है और उनकी ऊर्जा को जब वह किताब में पिरोते हैं तो एक नए साहित्य का सृजन होता है। इनकी किताबों को मैंने पढ़ा है। वास्तव में युवा राइटर काफी अच्छी रचना कर रहे हैं।
- विवेक अत्रे, पूर्व आईएएस
युवाओं का लेखन अब जरूरी है। चाहे नावेल हो या फिर कहानियां और कविताएं। युवा लेखकों की बात ही एकदम अलग हो चुकी है। उनकी रचनात्मकता एकदम अलग हटकर है।
- माधव कौशिक, चेयरमैन, चंडीगढ़ साहित्य अकादमी।