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Parakram Diwas 2022: फाइलों से बाहर नहीं आ पाया आजाद हिंद फौज के सिपाहियों का रिकॉर्ड

Sun, 23 Jan 2022 09:31 AM IST
अनुराग सक्सेना यशपाल शर्मा, चंडीगढ़।

सार

आजाद हिंद फौज के सिपाहियों के परिवारों के सदस्य इतिहास न बन पाने के लिए अभिलेखागार विभाग की अनदेखी को जिम्मेदार ठहराते हैं। कहते हैं कि सरकारें इतिहास बनाना चाहती थीं, मगर विभाग ने रिकॉर्ड को दबाकर रखा, जिसके कारण आज तक इस इतिहास संकलन को मूर्त नहीं मिल पाया।
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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले आजाद हिंद फौज के सिपाहियों का रिकॉर्ड सरकारी फाइलों में ही दफन है। राज्य अभिलेखागार विभाग की लापरवाही के कारण रिकॉर्ड आज तक इतिहास में तब्दील नहीं हो पाया। 1998 में ड्राफ्ट के तौर पर तैयार की गई पुस्तक ठंडे बस्ते में डाल दी गई। इससे आजाद हिंद फौज के सिपाहियों के आश्रितों में नाराजगी है।

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आजाद हिंद फौज के सिपाहियों के परिवारों के सदस्य सुरेंद्र ढूढी, मास्टर सुरेंद्र जागलान, कर्म सिंह व सतपाल इतिहास न बन पाने के लिए अभिलेखागार विभाग की अनदेखी को जिम्मेदार ठहराते हैं। उनका कहना है कि प्रदेश की सरकारें इतिहास बनाना चाहती थीं, मगर विभाग ने रिकॉर्ड को दबाकर रखा, जिसके कारण आज तक इस इतिहास संकलन को मूर्त नहीं मिल पाया। 1977 में पहली बार इनका इतिहास बनाने की मांग उठी थी। विभाग के पास रिकॉर्ड से लेकर फोटोग्राफ तक मौजूद हैं। बावजूद इसके नवंबर 2021 में निदेशक, अभिलेखागार ने डीसी को पत्र लिखकर रिकॉर्ड मांगा है। लेकिन, पत्र पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई। उनकी मांग है कि उत्तराधिकारियों को चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, गोवा, बिहार, पंजाब की तर्ज पर नौकरियों में 2 प्रतिशत खुला आरक्षण दिया जाए। उत्तराखंड सरकार की तर्ज पर सम्मान पेंशन मिले।

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1977 के आदेशों पर 2022 में उम्मीद जगी

आठ दिसंबर 1977 को निदेशक हरियाणा राज्य अभिलेखागार विभाग ने पहली बार आजाद हिंद फौज के सिपाहियों को इतिहास बनाने के लिए पत्र लिखकर जीवन संबंधी सूचना मांगी थी। पत्र में लिखा था कि अभिलेखागार विभाग उनका इतिहास बनाएगा। सूचना पत्र के साथ एक फार्म भी भेजा था, जिसे भरकर जमा करवाना था। सारी जानकारी उनकी ओर से भेज दी गई थी।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ ने उठाया बीड़ा

अब भाजपा अध्यक्ष ओपी धनखड़ ने गुमनामी के अंधेरे में जी रहे आजाद हिंद फौज के सिपाहियों के परिवारों को न्याय दिलाने का बीड़ा उठाया है, जिससे उन्हें इतिहास संकलन व परिजनों की संघर्ष गाथा से रू-ब-रू होने की आस जगी है। धनखड़ का कहना कि नेताजी व उनकी फौज को उचित मान-सम्मान दिलाएंगे। अभी वह काला पानी के दौरे पर थे। वहां से अपने साथ आजाद हिंद फौज के सिपाहियों का रिकॉर्ड लाए हैं, जो इतिहास संकलन में काम आएगा।

हरियाणा से आजाद हिंद फौज में शामिल रहे दो हजार सिपाही

देश की आजादी की लड़ाई में हरियाणा से पांच हजार से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों ने भाग लिया था, जिसमें दो हजार से अधिक आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। अधिकतर सेनानी इतिहास संकलन के इंतजार में स्वर्ग सिधार चुके हैं। आज लगभग 370 सेनानियों, आश्रितों को पेंशन दी जा रही है। प्रदेश में इस समय केवल आठ स्वतंत्रता सेनानी व 321 विधवाएं ही जीवित हैं। वे इस इंतजार में हैं कि उनके जीते जी आजाद हिंद फौज के सिपाहियों का इतिहास मूर्त रूप ले ले।

जवानों को स्वतंत्रता सेनानी दर्जा मिले

स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा के सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता श्रीभगवान फौगाट ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से आजाद हिंद फौज के गुमनाम सिपाहियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिलवाने की मांग रखी है। उन्होंने बताया कि जवानों का रिकॉर्ड, गौरव गाथा व इतिहास राष्ट्रीय अभिलेखागार में पाया गया है। उप मुख्यमंत्री ने गुमनाम सिपाहियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिलाने के साथ आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का आश्वासन दिया है।
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