1977 के आदेशों पर 2022 में उम्मीद जगी
आठ दिसंबर 1977 को निदेशक हरियाणा राज्य अभिलेखागार विभाग ने पहली बार आजाद हिंद फौज के सिपाहियों को इतिहास बनाने के लिए पत्र लिखकर जीवन संबंधी सूचना मांगी थी। पत्र में लिखा था कि अभिलेखागार विभाग उनका इतिहास बनाएगा। सूचना पत्र के साथ एक फार्म भी भेजा था, जिसे भरकर जमा करवाना था। सारी जानकारी उनकी ओर से भेज दी गई थी।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ ने उठाया बीड़ा
अब भाजपा अध्यक्ष ओपी धनखड़ ने गुमनामी के अंधेरे में जी रहे आजाद हिंद फौज के सिपाहियों के परिवारों को न्याय दिलाने का बीड़ा उठाया है, जिससे उन्हें इतिहास संकलन व परिजनों की संघर्ष गाथा से रू-ब-रू होने की आस जगी है। धनखड़ का कहना कि नेताजी व उनकी फौज को उचित मान-सम्मान दिलाएंगे। अभी वह काला पानी के दौरे पर थे। वहां से अपने साथ आजाद हिंद फौज के सिपाहियों का रिकॉर्ड लाए हैं, जो इतिहास संकलन में काम आएगा।
हरियाणा से आजाद हिंद फौज में शामिल रहे दो हजार सिपाही
देश की आजादी की लड़ाई में हरियाणा से पांच हजार से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों ने भाग लिया था, जिसमें दो हजार से अधिक आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। अधिकतर सेनानी इतिहास संकलन के इंतजार में स्वर्ग सिधार चुके हैं। आज लगभग 370 सेनानियों, आश्रितों को पेंशन दी जा रही है। प्रदेश में इस समय केवल आठ स्वतंत्रता सेनानी व 321 विधवाएं ही जीवित हैं। वे इस इंतजार में हैं कि उनके जीते जी आजाद हिंद फौज के सिपाहियों का इतिहास मूर्त रूप ले ले।
जवानों को स्वतंत्रता सेनानी दर्जा मिले
स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा के सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता श्रीभगवान फौगाट ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से आजाद हिंद फौज के गुमनाम सिपाहियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिलवाने की मांग रखी है। उन्होंने बताया कि जवानों का रिकॉर्ड, गौरव गाथा व इतिहास राष्ट्रीय अभिलेखागार में पाया गया है। उप मुख्यमंत्री ने गुमनाम सिपाहियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिलाने के साथ आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का आश्वासन दिया है।