नेक चंद के जन्म दिवस पर रॉक गार्डन में जन्म दिवस मनाने पहुंचे उनके पोते अहान और साथ में बहु अर्च?
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चंडीगढ़। रॉक गार्डन के निर्माता पद्मश्री नेकचंद सैनी का मंगलवार को 96वां जन्मदिवस मनाया गया। कोरोना को ध्यान में रखकर कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं हुआ। इस दौरान नेकचंद की बहू अर्चना और पोते आहान समेत उनके कुछ पारिवारिक मित्रों ने रॉक गार्डन में उनके बूथ पर फूल अर्पित कर श्रद्धा सुमन भेंट की। गौरतलब है कि नेकचंद की 12 जून 2015 को निधन हो गया था। बेशक आज वह दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपनी कला से ऐसी अमिट छाप छोड़ी है, जो हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगे।
सिटी ब्यूटीफुल में बसा रॉक गार्डन स्वर्गीय नेकचंद की 18 साल की तपस्या का परिणाम है। उन्होंने कूड़े और कबाड़ से ऐसी रचना की, जिसे देखकर हर कोई दांतों तले अंगुली दबा लेता है। आज यह दुनिया की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। उनकी इस कला को देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं। नेकचंद ने रॉक गार्डन का निर्माण प्रशासन की अनुमति के बिना 1956 में जंगल में चोरी छिपे शुरू किया था। गार्डन के निर्माण के लिए उन्होंने साइकिल पर पत्थर और कंधों पर पानी ढोया उसके बाद ही वह इस अनूठे कलाकृति का निर्माण करने में कामयाब हुए। अधिकारियों को इसके बारे में 1975 में भनक लगी। तब तक चार एकड़ में कलाकृतियां बन चुकी थीं। नियमों के खिलाफ मानते हुए इसे गिराने की तैयारी की जाने लगी तो लोग नेकचंद के समर्थन में आ गए। इसके बाद लेंडस्केप एडवायजरी कमेटी ने इसकी अनुमति दे दी। तत्कालीन चीफ एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. एमएस रंधावा ने इसे रॉक गार्डन का नाम दिया। रंधावा कला का काफी शौक रखते थे। उन्होंने गार्डन देखते ही नेकचंद की जमकर तारीफ की थी और इसके निर्माण करने की इजाजत दे दी थी। नेकचंद साइकिल पर पत्थरों की तलाश में निकलते थे। सकेतड़ी, नेपली और कसौली से वह अलग-अलग साइज के पत्थर चुन कर लाते। फिर किसी को मुंह तो किसी को सूंड बना देते। वह टूटी चूड़ियां लेने मनसा देवी मेले और सेक्टर- 15 की मार्किट जाते थे। उसके बाद उन्हीं चूड़ियों से कुछ न कुछ बनाकर देखते थे। महान शिल्पकार की इस कलाकृति से प्रभावित होकर केंद्र सरकार ने 1984 में नेकचंद को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था।
आर्टिस्ट वरुण टंडन ने उनकी याद में बनाया पोर्ट्रेट
आर्टिस्ट वरुण टंडन ने नेकचंद के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में एक पोर्ट्रेट बनाया। यह पोर्ट्रेट सीमेंट से तैयार किया गया है। वरुण ने बताया कि इस पोर्ट्रेट को बनाने में लगभग 5 घंटे का समय लगा। इसे हैंडमेड शीट पर सीमेंट से बनाया गया। 22/15 इंच का यह पोट्रेट उन्होंने नेक चंद के परिवार को उपहार के रूप में दिया, जिसे काफी पसंद किया गया। उन्होंने बताया कि पिछले 3 साल से वह उनके जन्मदिवस के उपलक्ष्य में पोर्ट्रेट बनाते आ रहे हैं हैं। इससे पहले वह मिट्टी, लकड़ी के बुरादे, कागज की वेस्टेज और पेंसिल के छिलकों से उनका पोट्रेट बना चुके हैं। उन्होंने कहा जब तक रॉक गार्डन है, नेकचंद को हमेशा याद किया जाएगा।