रॉक गार्डन को ऐसा बना दो कि यहां घूमने आने वाले लोग मुझे भले भूल जाएं, लेकिन इसको कभी न भूलें । गार्डन में आने वाले पर्यटकों को अच्छी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
पद्मश्री नेकचंद के बेटे अनुज सैनी ने यह बात अपने पिता के 91वें जन्मदिवस के पहले अमर उजाला से बातचीत के दौरान सांझा की।
अनुज ने बताया कि ‘पीजीआई के डाक्टरों में जब हमें बता दिया कि बाबूजी के पास समय कम है तो हमने उनका बर्थडे बेहतरीन तरीके से मनाया। इस दौरान सेक्टर - 18 में रहने वाले एक सरदार जी आए। उन्होंने बाबूजी बहुत आग्रह किया वह रॉक गार्डन को ठीक करने के लिए एक लाख रुपये ले लें। पहले बाबू जी ने मना किया लेकिन बहुत जोर देने के बाद उन्होंने उनकी बात मान ली। इस पर रॉक गार्डन में उन्होंने इस 25 हजार से आर्टिफिशियल घास लगाई। अनुज ने बताया कि यहां पर जो बचा हुआ पैसा है, हम गार्डन को सुंदर बनाने में लगाएंगे।’
नेकचंद की यादों को शेयर करते हुए अनुज सैनी ने बताया, ‘बाबू जी कहते थे कि अनुज रॉक गार्डन की सुंदरता पर बट्टा नहीं लगना चाहिए। इसके लिए वह हमेशा प्रशासन को लेटर लिखते थे। प्रशासन भी उनकी मांगों को मानने के लिए हमेशा तैयार रहता था। बाबू जी को यहां पर बैठना बहुत अच्छा लगता था। अगर किसी विदेशी पर्यटक को कोई शिकायत होती तो बाबू जी उसकी बात को प्रशासन तक रखते थे। उनकी समस्याओं का निदान होता था। वह रॉक गार्डन की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए हमेशा लड़ते रहे।