चंडीगढ़। तीन साल में फ्लैट का कब्जा देने का वादा कर छह साल तक भी न देना अंसल प्रॉपर्टी एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को महंगा पड़ गया। शिकायतकर्ता के हक में फैसला सुनाते हुए उपभोक्ता आयोग ने फ्लैट की राशि 44.58 लाख रुपये और बैंक द्वारा लगाया 10 लाख रुपये का ब्याज 9 प्रतिशत से देने का आदेश दिया। वहीं, 1.1 लाख रुपये मानसिक तनाव और कोर्ट खर्च के भी देने होंगे। मोहाली की फेज-2 निवासी शिकायतकर्ता डॉ. परविंदर कौर चावला ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में बताया कि उसने 2012 में एक फ्लैट बुक कराया था। फ्लैट की कुल कीमत 44.58 लाख रुपये थी और वादे के अनुसार तीन साल के भीतर कब्जा दिया जाना था। लेकिन छह साल बाद भी कब्जा नहीं दिया गया। इस फ्लैट को खरीदने के लिए उपभोक्ता ने एचडीएफसी बैंक से उपसंवर्धन योजना के तहत लोन लिया हुआ था, जिसकी ईएमआई केवल कब्जा मिलने के बाद शुरू होनी थीं। डेवलपर की ओर से समझौते का पालन न करने के कारण शिकायतकर्ता को बैंक को 10 लाख रुपये का ब्याज भुगतान करना पड़ा। इसके बाद उपभोक्ता द्वारा बार-बार आग्रह करने के बावजूद डेवलपर ने न तो कब्जा दिया और न ही देरी के लिए कोई मुआवजा दिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता के हक में फैसला सुना दिया।