डिजिटलाइजेशन के बाद भी चंडीगढ़ एस्टेट ऑफिस के कार्यप्रणाली में कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। लोगों को अपने काम करवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ रही है। इन शिकायतों के बाद पिछले सात दिनों में एस्टेट ऑफिस के सात कर्मचारी निलंबित हो चुके हैं।
लोगों को एस्टेट ऑफिस में काम करवाने में हमेशा ही परेशानी का सामना करना पड़ता है लेकिन अब प्रशासन अधिकारियों के इस रवैये को लेकर सख्ती के मूड में है। लंबित कार्यों को लेकर प्रशासन ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की है। यूटी सचिवालय में सभी ब्रांचों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद एस्टेट ऑफिसर ने दो सीनियर असिस्टेंट को निलंबित कर दिया है। इसमें सीनियर असिस्टेंट संदीप शर्मा और धर्मेंद्र शामिल हैं।
आदेश में कहा गया है कि ये अधिकारी अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहे हैं, जिससे प्रशासन को वित्तीय नुकसान हुआ है। इससे पहले 17 अगस्त को भी एक समीक्षा बैठक हुई थी। इसमें चार सीनियर और एक जूनियर असिस्टेंट को निलंबित कर दिया गया था। इनमें सीनियर असिस्टेंट शिव कुमार, अमनजोत सिंह, सरोज, शशि नागर और जूनियर असिस्टेंट सुनील पायल शामिल थे।
वित्त सचिव ले रहे हैं बैठक, जो नहीं दे पाता जवाब, उस पर होती है कार्रवाई
वित्त सचिव विजय नामदेवराव जड़े लगातार सभी ब्रांचों की कार्यप्रणाली को लेकर समीक्षा बैठक कर रहे हैं। मंगलवार को हुई बैठक में उन्होंने विस्तार से सभी कार्यों के बारे में जानकारी ली, जिसमें प्रमुख रूप से लीज होल्ड, किराए की संपत्तियों के लंबित बकाए की वसूली, रिज्यूम की गई संपत्तियों पर कब्जा, खाली प्लॉटों व लंबे समय से लंबित आवेदनों के निपटान के कार्य शामिल थे। इन सभी कार्यों के संबंध में जवाब को लेकर अधिकारियों को समय दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह उचित कार्रवाई के संबंध में अपना जवाब नहीं दे पाए इसलिए उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।