चंडीगढ़। डीएवी कॉलेज के छात्र रहे स्टार जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा टोक्यो ओलंपिक 2020 में पहुंच गए हैं। कोहनी की चोट से उभरने के बाद वापसी करते हुए नीरज ने साउथ अफ्रीका में एथलेटिक्स सेंट्रल नॉर्थ ईस्ट मीटिंग में 87.86 मीटर थ्रो के साथ यह उपलब्धि हासिल की। इस पर डीएवी कॉलेज केप्रबंधक, एथलेटिक्स खिलाड़ियाें में खुशी का माहौल है।
नीरज के पंचकूला के ताऊ देवी के कोच नसीम अहमद ने खुशी जताते हुए कहा कि यह देश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। ओलंपिक में मिल्खा सिंह और पीटी ऊषा एथलेटिक्स में चौथे स्थान पर रहे और मेडल से वंचित रहे थे। अब एक बार फिर से भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक में मेडल की दौड़ में है। मुझे पूरी उम्मीद है कि नीरज जेवलियन थ्रो में देश को मेडल जिताने में जरूर कामयाब रहेगा। नीरज ने 2011 से 2015 तक पंचकूला स्थित ताऊ देवी लाल स्टेडियम में एथलेटिक्स खेल नर्सरी में ट्रेनिंग की थी।
अच्छी जेवलियन खरीदने के लिए पैसे नहीं थे
नीरज चोपड़ा मूल रू प से हरियाणा के पानीपत के गांव खड़रा के रहने वाले है। यहां पर इनका संयुक्त परिवार रहता है। पिता सतीश कुमार और चाचा भीम चोपड़ा साथ रहते हैं। उनका परिवार किसान है। जेवलियन थ्रोअर बनने के दौरान एक दौर ऐसा यह आया कि नीरज के पास बेहतर जेवलियन (भाला) खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। नीरज के इस ख्ेाल के प्रति लगाव देखते हुए पिता सतीश कुमार और चाचा भीम सिंह चोपड़ा ने किसी तरह से पैसे इकट्ठे करके सात हजार रुपये का सस्ता जेविलयन खरीदा और इससे ही नीरज ने दिन में 8 घंटे अभ्यास किया था और नेशनल रिकार्ड भी बना डाला था।
कोहनी पर लगी चोट के कारण डेढ़ साल तक बाहर रहे
22 साल के नीरज चोपड़ा 2019 में कोहनी में चोट के कारण पूरे सत्र से बाहर रहे थे। चोट से उभरने के दौरान नीरज आईएएएफ वर्ल्ड चैंपयिनशिप, डायमंड लीग और एशियन चैंपियनशिप से चूक गए थे। उनकी अंतिम प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता 2018 जकार्ता एशियाई खेल थी। वहां उन्होंने 88.06 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था। चोट के लगभग डेढ़ साल बाद उन्होंने अपने चौथे प्रयास में 85 मीटर का ओलंपिक क्वालिफिकेशन मार्क हासिल किया और इस अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में टॉप पर रहे। उन्होंने शुरुआत 81.76 मीटर से की। दूसरे प्रयास में 82 मीटर और तीसरे प्रयास में 82.57 मीटर दूर जेवलियन फेंका।
ट्वीट करके सबका शुक्रिया किया
टोक्यो ओलंपिक 2020 में पहुंचने के फौरन बाद नीरज ने ट्वीट करते हुए लिखा कि प्रतिस्पर्धा में लौटकर अच्छा लग रहा है। सभी की शुभकामनाओं और सहयोग के लिए धन्यवाद। मैं परिणाम के साथ खुश हूं क्योंकि मैं सीजन के लिए वॉर्मअप होने के लिए प्रतियोगिता में गया था। जब मैंने पहले तीन थ्रो (सभी 80 मीटर से ऊपर) के साथ अच्छा किया, तो चौथे प्रयास में थोड़ा और जोर लगाने का फैसला किया और कामयाब रहा।
कोट
नीरज कॉलेज की शान है। इस खिलाड़ी ने हर बार अपनी क्षमता से अधिक प्रदर्शन किया। इसके टोक्यो ओलंपिक में पहुंचने पर कॉलेज प्रबंधन को इस खिलाड़ी पर फक्र है। -रविंदर चौधरी, डीएवी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के उप प्रधान