उन्होंने कहा कि अगर सरकार मुफ्त सुविधा मुहैया करा रही है तो कोई पैसा खर्च कर क्वारंटीन में क्यों रहना चाहेगा? होटल व्यवसाय पहले ही भारी घाटे का शिकार हो चुका है और अब उन पर एक और मार पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार होटलों को हो रहे नुकसान के लिए व्यवसायियों को मुआवजा दे।
होटलों को सरकार ने यह दिया है आदेश
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने यह अनिवार्य कर दिया है कि एनआरआई को पंजाब क्वारंटीन रूम में रहना होगा। मानसा और तरनतारन को छोड़कर सभी जिलों ने डिप्टी कमिश्नरों की देखरेख में होटलों में कमरों की व्यवस्था की है। राज्य सरकार की ओर से दिए आदेश में होटलों से कहा गया है कि वे एक डॉक्टर की व्यवस्था करें जो दिन में एक बार होटल में मौजूद लोगों की जांच करेगा और जिले के नोडल अधिकारी को रिपोर्ट करेगा।
होटलों को प्रयोगशालाओं के साथ टाई-अप करने और कचरे के निपटान की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है कि कोई भी क्वारंटीन व्यक्ति होटल से न भागे। उनके रिश्तेदारों को भी उनसे दूर रखा जाए। आदेशों के अनुसार, यदि इनमें से किसी भी दिशा-निर्देश का उल्लंघन किया जाता है तो होटल मालिक पर आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) के तहत महामारी रोग अधिनियम 1897 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
जो खर्च नहीं उठा सकते, उन्हें मुफ्त सुविधा: राणा सोढी
पंजाब के प्रवासी भारतीय मामलों संबंधी मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी ने कहा है कि एनआरआई के लिए संबंधित जिलों के होटलों में उचित प्रबंध किए गए हैं। लेकिन जो विद्यार्थी और प्रवासी होटलों का खर्च नहीं उठा सकते, उनके लिए मुफ्त सुविधा उपलब्ध करवाई गई है।